धामनोद में श्रुत पंचमी महापर्व पर जिनवाणी माता की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। नगरभर में श्रद्धालुओं ने पालकी की आरती उतारकर स्वागत किया। महिलाओं की विशेष सहभागिता, जिनवाणी पूजन और श्रुत पंचमी के महत्व पर हुए प्रवचनों ने आयोजन को धर्ममय बना दिया। पढ़िए यश जैन की यह रिपोर्ट
धामनोद। श्रुत पंचमी महापर्व के अवसर पर धामनोद में जिनवाणी माता की भव्य पालकी यात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। नगर के विभिन्न मार्गों से निकले इस विशाल चल समारोह में समाजजनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जगह-जगह पालकी की आरती कर जिनवाणी माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
15 दिनों की साधना का मिला पुण्यफल
समाज की महिलाओं द्वारा पिछले 15 दिनों से जिनवाणी माता की व्यावृत्ति, जीर्णोद्धार, कवर सज्जा एवं विशेष अलंकरण का कार्य किया जा रहा था। श्रुत पंचमी के दिन भव्य रूप से सुसज्जित पालकी में जिनवाणी माता को विराजमान किया गया।
पालकी में विराजमान कराने का प्रथम सौभाग्य एकता विजय जैन एवं ऊषा जैन बिखरोंन परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं द्वितीय लाभार्थी के रूप में पूर्णिमा, नरेंद्र, प्रीति, पीयूष एवं उनकी पुत्री प्रियांशी परिवार ने यह पुण्य लाभ अर्जित किया।
महिलाओं ने संभाली शोभायात्रा की अगुवाई
भव्य शोभायात्रा में महिलाएं सरस्वती माता एवं जिनवाणी भक्ति के गीत गाते हुए पालकी को अपने कंधों पर लेकर चल रही थीं। केसरिया साड़ियों में सुसज्जित महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। वहीं पुरुष सफेद वस्त्रों में पंचरंगी जैन ध्वज लेकर चल रहे थे।
नगर में गूंजे जिनवाणी के जयकारे
शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई महेश्वर फाटे तक पहुंची। ढोलक और वाद्य यंत्रों की मधुर थाप पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए। पूरे मार्ग में जिनवाणी माता के जयकारों से वातावरण धर्ममय बना रहा।
अभिषेक एवं शांतिधारा का हुआ आयोजन
शोभायात्रा के पुनः मंदिर पहुंचने पर भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। शांतिधारा का लाभ पूर्विका-अभिषेक जैन परिवार को प्राप्त हुआ। पूजन विधान महेश जैन एवं पंडित नितिन जैन के मार्गदर्शन में सम्पन्न कराया गया।
श्रुत पंचमी ज्ञान और स्वाध्याय का पर्व
इस अवसर पर श्रुत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह जैन समाज का अनूठा पर्व है, जिसमें भौतिक उत्सव या खान-पान की अपेक्षा ज्ञान, स्वाध्याय और आत्मचिंतन को महत्व दिया जाता है।
ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबली द्वारा रचित जैन धर्म के महान ग्रंथ षट्खण्डागम की रचना पूर्ण हुई थी। तीर्थंकर भगवान की दिव्यध्वनि को गणधरों ने ग्रहण कर लिपिबद्ध किया, जिसके माध्यम से आज भी जिनवाणी का अमूल्य ज्ञान समाज तक पहुंच रहा है।
नारी शक्ति की रही विशेष भूमिका
समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान एवं मीडिया प्रभारी यश जैन ने बताया कि इस वर्ष के आयोजन में महिला शक्ति की भूमिका विशेष रूप से प्रेरणादायी रही। बड़ी संख्या में महिलाओं ने आयोजन की तैयारियों से लेकर शोभायात्रा तक सक्रिय सहभागिता निभाई।
उन्होंने मुनि सेवा समिति, पुलिस प्रशासन एवं सभी समाजजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से श्रुत पंचमी महापर्व अत्यंत सफल एवं भव्य रूप में सम्पन्न हुआ।













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