श्रुत पंचमी पर जोबनेर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में जिनवाणी माता की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। धर्मसभा में जिनवाणी के महत्व पर प्रवचन हुए तथा समाज ने धार्मिक संस्कारों के लिए रात्रि पाठशाला शुरू करने का संकल्प लिया। पढ़िए डॉ राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट…
जोबनेर में श्रुत पंचमी महापर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज एवं 36 साधुओं के मंगल सानिध्य में जिनवाणी माता की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता का पूजन-अर्चन कर ज्ञान के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त की।
जिनवाणी का बताया आध्यात्मिक महत्व
धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि जिनवाणी अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीव को मोक्षमार्ग की ओर ले जाती है। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन षट्खंडागम ग्रंथ की रचना पूर्ण होने के उपलक्ष्य में श्रुत पंचमी मनाई जाती है। इसी कारण इस दिन शास्त्रों की शोभायात्रा निकालकर उनका पूजन किया जाता है।
आचार्य धरसेन से लेकर षट्खंडागम तक की प्रेरक कथा
डॉ. राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में आचार्य धरसेनाचार्य, आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूतबली द्वारा ताड़पत्रों पर षट्खंडागम के लेखन की ऐतिहासिक जानकारी देते हुए सम्यक ज्ञान को कर्मबंधन से मुक्ति का श्रेष्ठ साधन बताया।
फुलेरा की ओर मंगल विहार, भावुक हुई समाज
अल्प प्रवास के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का फुलेरा की ओर मंगल विहार हुआ। विदाई के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। 19 जून को संघ का रात्रि विश्राम राहुल स्कूल तथा 20 जून को गुमानपुरा राजकीय विद्यालय में आहार होगा।
रात्रि पाठशाला का संकल्प, बाबूलाल शाह ने लिया नियम
श्रुत पंचमी के अवसर पर जोबनेर समाज ने बच्चों में धार्मिक संस्कार विकसित करने के लिए रात्रि पाठशाला प्रारंभ करने का निर्णय लिया। वहीं बौली (जयपुर) के बाबूलाल शाह ने आचार्य श्री के समक्ष आगामी पाँच वर्षों में गृहत्याग कर संघ में शामिल होने का संकल्प लिया। उनके परिवार से मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी एवं मुनि श्री भुवन सागर जी पहले से ही संघ में विराजमान हैं।













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