बड़वानी में विराजित आचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब शेर जैसा जीव कालांतर में भगवान महावीर की पर्याय में आ सकता है तो हम क्यों नहीं। धामनोद से दीपक प्रधान की रिपोर्ट…
धामनोद/बड़वानी। बड़वानी में विराजित आचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब शेर जैसा जीव कालांतर में भगवान महावीर की पर्याय में आ सकता है तो हम क्यों नहीं। हमें मनुष्य जीवन मिला ही अपनी आत्मा के कल्याण के लिए। इस मनुष्य योनि में हम अपनी आत्मा का कल्याण कर सकते हैं। हम कई जन्मों से कई योनियों में भटके है और ऐसी कोई सी भी योनि नहीं है। जिसमें हमने जन्म नहीं लिया होगा। हमें जो पर्याय अभी मिली है उससे हमें सम्यक ज्ञान मिल सकता है। इस पर्याय में अपनी आत्मा का उद्धार नहीं करोगे तो कब करोगे। धर्म के लिए समय निकालना पड़ता है। अच्छे धर्म,अच्छे परिवार,अच्छी गति के लिए,अच्छे जीवन के लिए धर्म करना पड़ता है।
गलत शिक्षा देने वाले बहुत मिल जाएंगे
साधुओं को आहार दान देने से अच्छी गति मिलती है । आपको अच्छी शिक्षा देने वाले लोग कम मिलेंगे किन्तु गलत शिक्षा देने वाले बहुत मिल जाएंगे और उसी वजह से आपकी अगली पर्याय बिगड़ जाएगी। आज हम और साथ में आर्यिका माताजी बैठी है। जिन्होंने ऐसा कौन सा कर्म किया है जो हम यहां आर्यिका के रूप में बैठे हैं। हमने देव,शास्त्र,गुरु का श्रद्धान किया और मुनिसंघ आर्यिका संघ की सेवा की और हम शील धर्म का पालन कर रहे हैं और आपके बीच बैठे हैं। हमने पुण्य कार्य किया जिसका ये परिणाम है और मुनि आर्यिका की सेवा कर शील व्रत का पालन कर नगर-नगर डगर-डगर घूम रहे हैं और जो आहार दान दिया है। उसका फल है।
रात्रि भोजन नहीं करना है
आज साइंस कह रहा है कि रात्रि भोजन नहीं करना जिससे कई गंभीर बीमारियां होती है और हानि कारक है ,जो कि भगवान महावीर कई सदियों पहले रात्रि भोजन निषेध कर के गए। निर्ग्रन्थ संत 24 घंटे में एक बार आहार ,पानी लेते है और तृप्त हो जाते है और साधना में रत रहते है और अन्य लोग रात्रि में खा कर भी अतृप्त है और गंभीर बीमारियों को निमंत्रण दे रहे हैं।
भोजन स्वास्थ्य और परिणाम के लिए श्रेष्ठ है
इसी पर माताजी ने एक दृष्टांत दिया एक परिवार में
रात्रि भोज रखा। उसको खाने से जितने भी लोगों ने भोजन किया वो सब उल्टी के शिकार हुए क्योंकि खाने में छिपकली गिर गई थी किंतु, एक परिवार ऐसा था जिसमें कि जैन धर्म की लड़की ब्याह कर आई थी। उसने रात्रि भोजन का मना किया था तो वो पूरा परिवार बच गया और उस परिवार ने जैन धर्म को अंगीकार किया और रात्रि भोजन का त्याग किया ।जैन धर्म का भोजन स्वास्थ्य और परिणाम के लिए श्रेष्ठ है और उसका पालन करना चाहिए।













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