आध्यात्म, आस्था और समर्पण की पावन नगरी इंदौर के कालानीनगर क्षेत्र में इन दिनों भक्ति का ऐसा अनूठा रंग घुला है कि हर श्रद्धालु का हृदय प्रभु भक्ति में सराबोर हो उठा है। अवसर है कालानीनगर स्थित गुप्तिसदन जिनालय परिवार एवं सकल दिगंबर जैन समाज कालानीनगर के तत्वावधान में आयोजित ’’चतुर्थ वार्षिकोत्सव’’ का। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा क्षेत्र जिनवाणी की गूंज और भगवान के जयकारों से गुंजायमान है। इंदौर से पढ़िए, रेखा संजय जैन की यह विस्तृत रिपोर्ट…
इंदौर। आध्यात्म, आस्था और समर्पण की पावन नगरी इंदौर के कालानीनगर क्षेत्र में इन दिनों भक्ति का ऐसा अनूठा रंग घुला है कि हर श्रद्धालु का हृदय प्रभु भक्ति में सराबोर हो उठा है। अवसर है कालानीनगर स्थित गुप्तिसदन जिनालय परिवार एवं सकल दिगंबर जैन समाज कालानीनगर के तत्वावधान में आयोजित ’’चतुर्थ वार्षिकोत्सव’’ का। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा क्षेत्र जिनवाणी की गूंज और भगवान के जयकारों से गुंजायमान है। शनिवार को भक्ति और प्रभावना के चरम स्वरूप को प्रदर्शित करते हुए बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने जिनेंद्र आराधना कर असीम पुण्य का अर्जन किया।

मंगलाचरण और अभिषेक से हुआ पावन सवेरा
शनिवार की मंगल बेला में कार्यक्रम का शुभारंभ बेहद गरिमामय और भक्तिमय माहौल में हुआ। प्रातःकाल की सुरीली धुनों के बीच मूलनायक भगवान का जलाअभिषेक किया गया। इसके पश्चात विश्व शांति की कामना के साथ सामूहिक शांतिधारा की गई, जिसने संपूर्ण वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार कर दिया। नित्यमह पूजन के अंतर्गत देव-शास्त्र-गुरु की आराधना की गई। इस अलौकिक अनुष्ठान को विधानाचार्य पंडित श्री नितिन जी के कुशल निर्देशन में संपन्न कराया गया। भगवान का अभिषेक करवाते हुए पंडित जी ने श्रावकों को ‘चार कलश’ का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व प्रतिपादित किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विधि-विधान से किया गया अभिषेक आत्मा के विकारों को धोकर उसे निर्मल बनाता है।
अखंड भक्तामर पाठ का निष्ठापन और भव्य विधान
वार्षिकोत्सव का मुख्य आकर्षण संगीतमय भक्तामर विधान और अखंड भक्तामर पाठ का निष्ठापन रहा। आचार्य मानतुंग स्वामी विरचित भक्तामर स्तोत्र के महामंत्रों की शक्ति का प्रभाव आयोजन में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। विधानाचार्य पंडित नितिन जी के सुमधुर कंठ और संगीतमय लहरियों पर झूमते हुए महिला एवं पुरुष श्रद्धालु भक्तों ने विधान के पावन अर्घ्य समर्पित किए। भक्ति के इस सागर में डूबे श्रद्धालु हाथ जोड़कर, नृत्य करते हुए प्रभु चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित कर रहे थे। पुण्यार्जक परिवारों ने विशेष रूप से अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना कर समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।
चलो धरती को स्वर्ग बनाएं’ सजेगा इंद्र-इंद्राणी दरबार
कार्यक्रम संयोजक युवा एवं महिला संगठन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार तथा समाज की वरिष्ठ समाजसेविका ऊषा पाटनी ने बताया कि शनिवार की रात्रि का आकर्षण और भी विहंगम होने वाला है। रात 8 बजे से ‘चलो धरती को स्वर्ग बनाएं’ विशेष सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम के तहत भव्य इंद्र-इंद्राणी दरबार सजाया जाएगा। इस दौरान देवलोक सा नजारा धरती पर जीवंत हो उठेगा। भजनों की अनूठी प्रस्तुतियों के बीच आनंद की ऐसी रसधार बहेगी, जिसमें समस्त जैन समाज और भक्त समुदाय गोते लगाकर आत्मिक सुख का अनुभव करेगा।
रविवार को बैंडबाजों के साथ निकलेगी प्रभु की भव्य पालकी यात्रा
यह धार्मिक उत्सव रविवार को अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचेगा। रविवार सुबह पुनः भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और नित्यमह पूजन पूर्ण निष्ठा के साथ किया जाएगा। इसके उपरांत, संपूर्ण कालानीनगर क्षेत्र में भगवान की एक भव्य और अलौकिक पालकी यात्रा निकाली जाएगी। इस पालकी यात्रा में पारंपरिक बैंडबाजे, ढोल-नगाड़े और धर्म ध्वजा लिए श्रावक आगे-आगे चलेंगे, वहीं श्राविकाएं मंगल कलश धारण कर भक्ति नृत्य करती नजर आएंगी। समाज के पदाधिकारियों ने कालानीनगर और इंदौर के समस्त जैन समाज के धर्मप्राण बंधुओं से अनुरोध किया है कि वे इस पालकी यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित होकर जिनशासन की प्रभावना बढ़ाएं और पुण्य लाभ अर्जित करें।













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