21 वीं सदी के भौतिकवादी युग में अपने द्रव्य का उपयोग गुरु सानिध्य में भगवान के पूजन और पंचामृत धार्मिक अनुष्ठान तथा आराध्य गुरु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में करते हैं। जयपुर से पढ़िए, डॉ. राजेश पंचोलिया की यह खबर…
जयपुर। 21 वीं सदी के भौतिकवादी युग में अपने द्रव्य का उपयोग गुरु सानिध्य में भगवान के पूजन और पंचामृत धार्मिक अनुष्ठान तथा आराध्य गुरु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में करते हैं। असम गुवहाटी के भागचंद, सुनीता चूड़ीवाल सहित समस्त चूड़़ीवाल परिवार ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में जयपुर बड़ के बालाजी चंद्रपुरी में 9 जून को श्री चंद्रप्रभ भगवान का पंचामृत अभिषेक और पूजन अष्ट द्रव्यों विभिन्न फलों, नैवेद्य, पुष्प, सूखे मेवे से भक्ति नृत्य पूर्वक किया। दोपहर को मंडल विधान का पूजन हुआ।

आचार्य संघ सनिध्य में प्रातः काल भगवान श्री चंद्रप्रभ का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल पानी, शर्करा, विभिन्न फलों और सुखे मेवों के रसों, दूध, घी, दही, सर्वाेषधि, विभिन्न पुष्प केशर, सुगंधित जल, चार कलश से किया गया एवं शांतिधारा की। यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मतीजी चूड़ीवाल परिवार की हैं। गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी की समाधि इसी स्थान पर हुई है। भव्य मंदिर के साथ वैराग्य का दिग्दर्शन प्रतीक समाधिस्थल भी बनाया गया हैं।













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