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मुनिश्री सुधासागरजी की अगवानी में भक्तों का उमड़ा सैलाब : संत सुधा सागर मार्ग का हुआ लोकार्पण


पांच माह पूर्व नगर में भव्य चातुर्मास कर आज जब मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ 18 पिच्छिका के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर…


अशोक नगर। पांच माह पूर्व नगर में भव्य चातुर्मास कर आज जब मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ 18 पिच्छिका के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। नगर के बाहर पूर्व मंत्री राव ब्रजेन्द्रसिंह यादव, पूर्व विधायक जजपाल सिंह जज्जी, नगर पालिका अध्यक्ष नीरज मनोरिया, जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र और विजय धुर्रा सहित अन्य प्रमुखजनों ने श्रीफल भेंटकर सभी मंडलों के साथ अगवानी की। भव्य अगवानी में कलेक्टर साकेत मालवीय, जिला पंचायत सीईओ राजेश सी कुमार, विश्व हिन्दू परिषद के दीपक मिश्रा सहित अन्य प्रमुखजनों ने पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। यह भव्य शोभायात्रा विदेशा रोड, त्रिदेव चौराहा, तारा सदन, एचडीएफसी चौराहा, पुराना बस स्टैंड, गांधी पार्क होते हुए भगवान महावीर मार्ग, विद्यासागर द्वार होते हुए सुभाषगंज पहुंची। यहां धर्मसभा हुई।

पूरा शहर मुनि श्री की अगवानी में उमड़ा

जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि पांच माह बाद मुनिश्री के आगमन पर पूरा शहर उमड़ पड़ा। शासन प्रशासन ने बहुत सुंदर व्यावस्था बनाई। हम सबके लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक है। पूर्व मंत्री राव ब्रजेन्द्रसिंह यादव, पूर्व विधायक जजपाल सिंह जज्जी, नपा अध्यक्ष नीरज मनोरिया के आतिथ्य में संत सुधा सागर मार्ग का लोकार्पण समारोह हुआ। अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, महामंत्री मनोज भैसरवास सहित अन्य प्रमुखजनों ने मुनि श्री से ग्रीष्म काल वाचना के लिए श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। इस दौरान मंत्री शैलेन्द्र श्रागर ने कहा कि हमारे पुण्य के उदय से हमें इस भीषण गर्मी में भी आपके चरण सान्निध्य का सौभाग्य मिला। इसका अधिकतम उपयोग करना है।

धर्म ना आकाश से आता ना पाताल से

धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी ने कहा कि धर्म ना आकाश से आता है। ना पाताल से, धर्म ना पूर्व से, ना पश्चिम से, धर्म धर्मात्माओं की आत्मा से प्रकट होता है। लोग धर्म को दुनिया में खोजते हैं। भूल जाते हैं हिरण के समान हिरण कस्तूरी को पाने के लिए दुनिया में भटकता रहता है। उसे मालूम नहीं रहता कि कस्तूरी तो उसकी नाभि में है। ऐसे ही लोग दुनिया में भटकते रहते हैं धर्म पाने के लिए, उन्हें पता ही नहीं रहता कि धर्म तुम्हारे भीतर से ही प्रकट होगा। धर्म भक्तों के हृदय में उमड़ता है। धन मालिक नहीं होता धनी मालिक होते हैं। ऐसे ही भक्त ही धर्मात्मा होता है। धर्म बड़ा नहीं होता धर्मात्मा बड़ा होता है। जिसके के अंदर धर्म उमड़ जाए। वहीं धर्मात्मा होता है। अगवानी कराईं नहीं जाती अगवानी हो जाती है। भक्तों को बुलाया नहीं जाता भक्त आते हैं। शुरू से ही पता चल गया था, जज्जी अपने घर व्यापक तैयारी के साथ ले गया। तब ही हमने अपने पैरों को कह दिया था तैयार रहना है। इस बार की अगवानी के लिए पैर तैयार रहे। चातुर्मास की अगवानी में असाढ़ था। उस समय तो बादलों ने मेहरबानी की थी, आज कोई मेहरबानी करने वाला नहीं है। आज सूरज भी ऊपर चढ़ा है। ये ज्येष्ठ की अगवानी है। भक्तो का उत्साह शिखर पर था। मुनि श्री ने कहा कि पिछले बार पुलिस वाले सादे रस्से लाए थे। इस बार तो बने बनाए जबरदस्त रस्से बांधकर लाए थे। फिर भी जनता नहीं संभल रही थी। यही तो मौके होते हैं। जिंदगी के ये भक्तों का उत्साह और उमंग थी, जो उपकारी के प्रति लेकर आए थे। मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति धर्म तो हमेशा करता है। व्यक्ति महोत्सव कभी कभी करता है। भक्ति तो हमेशा करता है ऐसी भक्ति कभी-कभी होती है। जिंदगी में यही तो मौके आते है। यही स्मृति बन जाती है। यही चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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