श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति भारत द्वारा 17 से 28 मई तक चल रहे ग्रीष्म कालीन संस्कार शिक्षण शिविरों में शुक्रवार को शिविर की क्लासेज के साथ साथ सभी स्थानों पर आध्यात्मिक भजन प्रस्तुति के कार्यक्रम किए गए। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…
जयपुर। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति भारत द्वारा 17 से 28 मई तक चल रहे ग्रीष्म कालीन संस्कार शिक्षण शिविरों में शुक्रवार को शिविर की क्लासेज के साथ साथ सभी स्थानों पर आध्यात्मिक भजन प्रस्तुति के कार्यक्रम किए गए। सभी मंदिरों में अरिहंत गाऊँ- सिद्दों को ध्याऊँ” तथा “चारों मंगल उत्तम है, इनकी शरण में आ जाए” के मधुर बोल सुनाई दे रहे थे। प्रचार प्रसार प्रभारी पदम जैन बिलाला के अनुसार मीरा मार्ग में संस्थान के मानद मंत्री सुरेश कासलीवाल, बालिका छात्रावास की निदेशिका डॉ. वंदना जैन तथा आँचल अध्यक्षा शालिनी बाकलीवाल की उपस्थिति में शिविर का शुभारंभ हुआ। जहाँ देखा गया कि बच्चे केसरियाँ ध्वज के साथ आए और पांव धोकर शिविर की क्लासेज में प्रवेश किया। डॉ.वंदना जैन ने बच्चों से कई संस्कार से संबंधित जानकारी प्राप्त कर खुशी जाहिर की तथा सुरेश कसलीवाल ने संस्थान के द्वादश वर्षीय पाठ्यक्रम की चर्चा की। अधिष्ठात्री शिला जैन ड्योडा के साथ संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा गायत्री नगर तथा थड़ी मार्केट मंदिरों में भी विजिट कर जानकारी प्राप्त की गई। सभी अतिथियों का मंदिर पदाधिकारियों ने स्वागत किया। अधिष्ठात्री शिला जैन ड्योडा ने कहा कि शिविरों से बच्चों की बहुत अच्छी प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रही है। शिविरों में छोटे-छोटे बच्चों को राइम्स के माध्यम से जीव दया- दर्शन अभिषेक के संस्कार समझाये जा रहे हैं।
जैसे “चींटी हो या नन्हा पक्षी सबकी रक्षा करनी अच्छी, जीव दया जो अपनाए सच्चा जैन वह कहलाए” या अम्मा अम्मा मुझे कलश दिला दो ,अभिषेक करने जाऊँगा” आदि आदि। इन से बच्चे बहुत जल्द समझ पाते हैं। जयपुर शिविर प्रभारी विनीता जैन के अनुसार प्रथम बार शिविर लगा रहे राधा विहार मंदिर तथा तारो की कूट मंदिर में छहढाला में चारो गतियों के दुखों को समझाया गया। प्रतापनगर सेक्टर पाँच में शिविरों को पूजा पाठ का नहीं संस्कार व नैतिक शिक्षा का स्थान बताया। चित्रकूट कॉलोनी में भगवान पार्श्व नाथ के उपसर्गों को समझाया गया। विवेक विहार में इष्टोपदेश ग्रंथ, दुर्गापुरा में तत्वार्थ सूत्र पढ़ाया गया तथा अरिहंत विहार, धाबास, नया बाजार चोमू, जनकपुरी, सहित सभी मंदिरो में विशेष कार्यक्रम किए जा रहे हैं।













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