दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र अंतरिक्ष पारसनाथ वाशिम महाराष्ट्र में आयोजित श्री अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत् परिषद् का निर्ग्रंथ बोधि शिविर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं नवाचार्य श्री समय सागर जी के मंगल आशीर्वाद से एलक सिद्धांत सागर महाराज जी के मंगल सानिध्य में हुआ। वाशिम से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर…
वाशिम (महाराष्ट्र)। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र अंतरिक्ष पारसनाथ वाशिम महाराष्ट्र में आयोजित श्री अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत् परिषद् का निर्ग्रंथ बोधि शिविर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज एवं नवाचार्य श्री समय सागर जी के मंगल आशीर्वाद से एलक सिद्धांत सागर महाराज जी के मंगल सानिध्य में हुआ। इस शिविर में 9 से 17 मई तक निरंतर दिगंबर परंपरा में होने वाले स्खलन से श्वेतांबर परंपरा का उद्भव एवं श्वेतांबर की 15 कल्पनाएं उनके द्वारा आगम विरुद्ध सिद्धांतों का सृजन आदि पर विशेष चर्चा करते हुए श्वेतांबर एवं दिगंबर ग्रंथों का संदर्भ लेकर सभी विद्वानों के ज्ञान को परमार्जित किया।
श्वेताम्बर निरन्तर रच रहे षड्यंत्र
इस प्रकार श्वेतांबर अपने पंथ का पोषण करने के लिए मंदिर एवं क्षेत्र पर अधिकार करने के लिए षड्यंत्र रचते हैं। प्रतिमाओं को स्थापित करने का, दिगंबर प्रतिमाओं पर चक्षु लगाने का एवं दिगंबर मंदिरों एवं क्षेत्र पर श्वेतांबर श्रावक श्राविकाओं द्वारा दिए गए दान का आधार बनाकर किस प्रकार अपना अधिकार बताते हैं, विस्तृत चर्चा की गई। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत् परिषद् के अध्यक्ष डॉ. सनतकुमार जयपुर, महामंत्री ब्रह्मचारी जिनेश मलैया इंदौर, संरक्षक डॉ नलिन के शास्त्री, डॉ. सुदर्शन लाल भोपाल सहित कई वरिष्ठ विद्वानों, ब्रह्मचारियों और बहनों ने आयोजित शिविर में विशेष गौरव प्रदान किया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद् के महामंत्री जयकुमार निशांत टीकमगढ़, उपाध्यक्ष पंडित विनोद कुमार रजवांस, संयुक्त मंत्री डॉ. आशीष जैन सागर सहित कई विद्वानों ने उपस्थित होकर अपना ज्ञान वर्द्धन किया।
पुरस्कार सम्मान प्रदान किए
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत् परिषद् के अधिवेशन में कई प्रस्ताव पारित किए गए एवं 11 पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अवदान के लिए प्रदान किए गए। संस्कृत विद्या को जन-जन तक पहुंचाने उन्नयन करने एवं साहित्य सृजन करने के लिए एवं संस्कृत साहित्य के माध्यम से साहित्य सृजन के लिए डॉ.संगीता मेहता को यह पुरस्कार स्वर्गीय गुलाब चंद मलैया की पुण्य स्मृति में नेमीचंद, ब्रह्मचारी सुरेश भैया, ब्रह्मचारी राजेश भैया, ब्रह्मचारी जिनेश भैया द्वारा प्रदान किया गया। सभी विद्वानों ने पुरस्कार के लिए बहुत-बहुत बधाइयां प्रेषित की। एलक श्री सिद्धांत सागर जी ने कहा विद्वानों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ स्वाध्याय की ओर प्रेरणा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो विद्वान स्वाध्याय के रूप विशेष प्रभावना करेंगे, उनके लिए विशेष रूप से बहुमान किया जाए। ब्रह्मचारी दिनेश मलैया ने सभी विद्वानों का आभार व्यक्त करते हुए सभी को होने वाले अगले शिविर में आमंत्रित किया।













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