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मुनिश्री आदित्यसागर जी ने एकाग्र मन की महत्ता बताई : फागी से मुनिश्री के दर्शनार्थ पहुंचा दल, समाजजनों ने किया सम्मान  


फागी कस्बे से शनिवार को इंदौर में विराजमान मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के दर्शनार्थ यात्रियों का दल श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर अंजनी नगर पहुंचा। यात्रियों ने मुनिश्री का आशीष लिया। यहां उनका इंदौर मंदिर समिति ने सम्मान किया। फागी/जयपुर से पढ़िए, यह खबर…


फागी/जयपुर। फागी कस्बे से शनिवार को इंदौर में विराजमान मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के दर्शनार्थ यात्रियों का दल श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर अंजनी नगर पहुंचा। जहां पर ग्रीष्म कालीन वाचना में धर्म की प्रभावना बढ़ा रहे आचार्य आदित्य सागर जी के दर्शनकर धर्म लाभ प्राप्त किया। यहां पर मुनिश्री अप्रमितसागरजी, मुनिश्री सहजसागरजी तथा क्षुल्लक श्री श्रेयश सागरजी विराजमान हैं। जैन महासभा के प्रतिनिधि राजाबाबू ने बताया कि इस कार्यक्रम में राजाबाबू गोधा चित्रा गोधा, उदित पूर्णिमा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम आरंभ किया तथा मुनि संघ का पाद प्रक्षालन कर धर्मलाभ प्राप्त किया। इसी कड़ी में मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सोगानी, उपाध्यक्ष ऋषभ पाटनी, सचिव संजय मोदी तथा कोषाध्यक्ष अशोक टोंग्या सहित कार्यकारिणी ने गोधा परिवार का साफा, माला, तिलक दुपट्टा लगाकर सम्मान किया।

ज्ञान की वृद्धि मन की स्थिरता से होगी

कार्यक्रम में मुनि श्री ने धर्मसभा में कहा कि एकाग्र मन ही हमारा मित्र है, जितना मन एकाग्र रहेगा उतना ही जल्दी विद्याओं का भंडार भरेगा। ज्ञान की वृद्धि मन की स्थिरता से होगी। सुख और दुख दोनों ही स्थितियों में मन को एक समान रखने का अभ्यास करें। तनाव और अशांति दुख का मुख्य कारण है। जब आप परिणाम से मोह त्याग देते हैं तो मन स्वतः स्थिर हो जाता है। वर्तमान में जीना अतीत की गलतियों का पछतावा है और भविष्य की अत्यधिक चिंता मन को अशांत करती है। आज मैं जीना और वर्तमान परिस्थितियों को स्वीकार करना स्थिरता लाता है। जिसने मन को जीत लिया मन उसका सबसे बड़ा मित्र है। जिसने मन को नहीं जीता मन उसका सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है। कार्यक्रम में मंदिर समिति की कार्यकारिणी सहित सारा सकल जैन समाज मौजूद था।

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