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श्रद्धा भक्ति आध्यात्मिक उल्लास छाया खंदारजी में : भगवान शांतिनाथ का जन्म तप एवं निर्वाण कल्याणक पर हुए कार्यक्रम


 दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदारजी में श्रद्धा, भक्ति और वीतरागता के साथ भगवान शांतिनाथ का जन्म तप एवं निर्वाण कल्याणक मनाया गया। खंदारजी से पढ़िए, यह खबर…


खंदारजी। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदारजी में श्रद्धा, भक्ति और वीतरागता के साथ भगवान शांतिनाथ का जन्म तप एवं निर्वाण कल्याणक मनाया गया। चन्देरी क्षेत्र स्थित श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदारजी में भगवान शांतिनाथ का जन्म तप एवं निर्वाण कल्याणक अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। प्रातः 7 बजे मंगलमय वातावरण में मंगलाष्टक पाठ के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर समस्त विश्व में सुख, शांति, समृद्धि एवं जीवमात्र के कल्याण की मंगल कामना की गई।

कार्यक्रम में भगवान शांतिनाथ भगवान का पांडूक शिला पर विधिविधानपूर्वक अभिषेक किया गया एवं शांतिधारा हुई। प्रथम पुण्यार्जन का सौभाग्य अनिल कुमार एवं राकेश कुमार बड़घड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। राजकुमार, अमन-नमन कठरया, विवेक, मुकेश, जयेन्द्र अविरल अतिशय कठरया, मेधा मनीष एवं अतुल कठरया परिवार सहित अनेक श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया।

संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच पूजन

भक्ति और संगीत की मधुर स्वर लहरियों के मध्य भगवान का पूजन एवं भक्तामर विधान बड़घड़िया परिवार तथा समस्त श्रद्धालुओं के सहयोग से अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। उपस्थित जनसमूह ने भगवान शांतिनाथ के निर्वाण कल्याणक अवसर पर श्रद्धा सहित निर्वाण लाड़ू समर्पित कर वीतराग प्रभु के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित की। पूरे आयोजन को खंदार पूजन मंडल के समर्पित प्रयासों ने भव्य महामहोत्सव का स्वरूप प्रदान किया। धर्मसभा में वक्ताओं ने कहा कि जैन दर्शन अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि का मार्ग है तथा तीर्थंकरों के कल्याणक पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की प्रेरणा हैं। श्रद्धालुओं की उपस्थिति, भक्तिमय वातावरण और जिनेन्द्र भक्ति से संपूर्ण खंदार क्षेत्र धर्ममय हो उठा तथा “णमो अरिहंताणं” की मंगल ध्वनि से वातावरण गुंजायमान रहा।

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