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आचार्यश्री ज्ञानसागर जी का अवतरण दिवस मनाया : भक्ति और सेवा का उमड़ा सागर


आचार्यश्री ज्ञानसागरजी का 69वां अवतरण दिवस श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परेड में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के साथ हर्षाेल्लास और श्रद्धाभाव से मनाया गया। मुरैना में जन्मे आचार्य श्री के अवतरण दिवस पर पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। अंबाह से पढ़िए, यह खबर…


अंबाह। आचार्यश्री ज्ञानसागरजी का 69वां अवतरण दिवस श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परेड में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के साथ हर्षाेल्लास और श्रद्धाभाव से मनाया गया। मुरैना में जन्मे आचार्य श्री के अवतरण दिवस पर पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकालीन बेला में श्री जिनेंद्र प्रभु के जलाभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन कर आचार्य श्री के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इसके पश्चात मंदिर परिसर में भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। परेड मंदिर के प्रवेश द्वार पर आयोजित विशाल भंडारे के अंतर्गत अन्नदान किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आमजन, श्रद्धालु एवं राहगीरों ने भोजन एवं शीतल पेय ग्रहण किया। भीषण गर्मी के बावजूद शीतल पेय एवं अन्न प्रसादी पाकर उपस्थित सभी लोगों ने संतोष और आनंद का अनुभव किया। सेवा भाव से परिपूर्ण इस आयोजन ने समाज में समरसता और करुणा का संदेश दिया। कार्यक्रम के शुभारंभ से पूर्व आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य जनों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर प्रसादी वितरण का शुभारंभ किया।

इनकी उपस्थिति में किया गया कार्यक्रम 

प्रमुख रूप से महेश चंद जैन शिक्षक, आनंद जैन टकसारी, शगुनचंद जैन दिल्ली, महेशचंद जैन एमपीईबी, अरुण जैन पार्षद, विमल जैन राजू, संतोष जैन, कुलदीप जैन, दिलीप जैन, उपेंद्र पटेल, अनिल जैन खरगोला, विकास जैन पांडे, ओपी जैन, पूरनचंद जैन, अमित जैन टकसारी, श्रेयांस जैन, विकास जैन एसके, लबली जैन, मनीष जैन, अजय जैन बबलू, डॉ. बी जैन, सोनू जैन, राहुल नायक एवं आकाश जैन उपस्थित रहे।

सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं 

इस अवसर पर प्रमुख वक्ता कुलदीप जैन ने आचार्य श्री के जीवन, विचार और समाज में उनके योगदान पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री का जीवन केवल एक साधु जीवन नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रेरक धारा है, जिसने चंबल अंचल की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी है। विमल जैन राजू ने कहा कि आचार्य श्री ने अपने तप, त्याग और संयम से यह सिद्ध किया है कि सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जीवन को संस्कारित करने की एक सतत प्रक्रिया है।

मुरैना का नाम आध्यात्मिक धरोहर के रूप में स्थापित किया

आचार्य श्री ने समाज को अहिंसा, शाकाहार, अपरिग्रह और आत्मसंयम का मार्ग दिखाया। उनके प्रवचन केवल धार्मिक उपदेश नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। महेश जैन एमपीईबी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि उनके आदर्शों को अपनाए तो समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः संभव है। उन्होंने विशेष रूप से यह बात कही कि आचार्य श्री ने चंबल अंचल को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है और मुरैना का नाम आध्यात्मिक धरोहर के रूप में स्थापित किया है। कार्यक्रम में महेशचंद जैन शिक्षक ने भी आचार्य श्री के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन संयम, त्याग, तपस्या और समाज सुधार की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि आचार्य श्री ने जैन दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आचार्य श्री की महाआरती की

इसके पश्चात उपस्थित सभी गुरुभक्तों द्वारा पूज्य आचार्य श्री की महाआरती की गई। पूरा मंदिर परिसर “जयकारों” और भक्ति गीतों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर आचार्य श्री के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। आयोजन समिति द्वारा सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया और इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।

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