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आदिनाथ की करुणा और आरोग्य का संगम: राजकीय विद्यालय में ‘ऋषभदेव पखवाड़ा’ का भव्य समापन


अहिंसा परमो धर्म और स्वस्थ तन, स्वस्थ मन के पावन संकल्प के साथ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (तोपखाना) में ‘तीर्थंकर ऋषभदेव पखवाड़ा’ के अंतर्गत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। झालरापाटन से पढ़िए, यह खबर…


झालरापाटन। अहिंसा परमो धर्म और स्वस्थ तन, स्वस्थ मन के पावन संकल्प के साथ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (तोपखाना) में ‘तीर्थंकर ऋषभदेव पखवाड़ा’ के अंतर्गत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आरोग्य भारती और राजकीय विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को धर्म, संस्कृति और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए पुरस्कृत किया गया।

भक्ति और ज्ञान की धारा

कार्यक्रम का शुभारंभ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के सिद्धांतों के स्मरण के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता एवं आरोग्य भारती के संयोजक (उप प्राचार्य, डाइट) सुरेंद्र जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान ऋषभदेव ने ही समाज को ‘असि, मसि और कृषि’ का ज्ञान देकर सभ्यता की नींव रखी थी। उन्होंने जैन धर्म के अहिंसा मूलक विचारों को आधुनिक स्वास्थ्य जीवन शैली से जोड़ते हुए बताया कि संयमित खान-पान और विचार कैसे हमारे जीवन को सुखमय बना सकते हैं।

प्रश्नोत्तरी में दिखा उत्साह

कार्यक्रम के दौरान सुनील गुप्ता ने स्वस्थ जीवन शैली और जैन सिद्धांतों पर आधारित एक रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का संचालन किया। विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ ऋषभदेव जी के जीवन और आरोग्य के नियमों से जुड़े सवालों के जवाब दिए। सही उत्तर देने वाले छात्र-छात्राओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया। प्रधानाचार्य पूनम सेंगर ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अनुशासन और अच्छे स्वास्थ्य के बिना विद्यार्थी जीवन अधूरा है।

नारों से गुंजायमान हुआ परिसर

विद्यालय परिसर उस समय देशभक्ति और शांति के स्वर से गूंज उठा जब विद्यार्थियों ने विश्व शांति, अहिंसा की स्थापना और राष्ट्र सेवा के लिए गगनभेदी नारे लगाए। पखवाड़े के समापन पर कक्षा 11 वीं और 12 वीं के उन सभी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इस गरिमामयी अवसर पर उप प्रधानाचार्य प्रदीप कुमार शर्मा सहित अंशु शर्मा, राजेंद्र गुप्ता, हंसा कठेत, सितारा बेगम और अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इसने नई पीढ़ी में अपनी जड़ों और संस्कृति के प्रति गर्व का भाव भी जगाया।

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