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बुंदेलखंड में 2 मई से शुरू होंगे प्राकृत विद्या शिक्षण शिविर : शिविरों के माध्यम से नई पीढ़ी को अमूल्य धरोहर से जोड़ने का प्रयास


बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन द्वारा प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का आयोजन 2 मई से किया जा रहा है। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर…


बकस्वाहा। बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राकृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन द्वारा प्राकृत विद्या शिक्षण शिविरों का आयोजन 2 मई से किया जा रहा है। यह शिविर आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की प्रेरणा तथा आचार्य श्री समयसागर जी, आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य, शाहगढ़ (सागर) ने बताया कि प्राकृत भाषा हमारी प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की मूल धारा है। इन शिक्षण शिविरों के माध्यम से नई पीढ़ी को इस अमूल्य धरोहर से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भाषा के साथ-साथ संस्कारों का भी संवर्धन हो सके।

वहीं क्षेत्रीय संयोजक विजय जैन शास्त्री ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में ये शिविर विद्यार्थियों एवं जिज्ञासुओं के लिए एक उत्कृष्ट अवसर हैं। शिविरों में सरल, व्यवहारिक एवं प्रभावी पद्धति से प्राकृत भाषा का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इस भाषा को सीखकर अपने जीवन में आत्मसात कर सकें।

विशेष प्रशिक्षण सत्र निर्धारित

मीडिया प्रभारी राजेश जैन ‘रागी’, बकस्वाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविरों की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। प्रथम चरण में शिविरों का आयोजन बकस्वाहा, शाहगढ़, बम्होरी, हटा, भगवां, टीकमगढ़ आदि अनेक स्थानों पर किया जाएगा। इन शिविरों में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं भाषा प्रेमियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र निर्धारित किए गए हैं। सभी इच्छुक प्रतिभागियों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आग्रह किया गया है, ताकि प्राकृत भाषा के इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल सके।

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