भगवान महावीर तपोभूमि उज्जैन प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से जयपुर-कोटा हाईवे पर स्थित चाकसू तहसील के निमोड़िया गांव में करीब 21 बीघा भूमि पर गोलोक धाम का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। जयपुर से पढ़िए, उदयभान जैन की रिपोर्ट…
जयपुर। भगवान महावीर तपोभूमि उज्जैन के प्रणेता आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी की प्रेरणा और आशीर्वाद से जयपुर-कोटा हाईवे पर स्थित चाकसू तहसील के निमोड़िया गांव में करीब 21 बीघा भूमि पर गोलोक धाम का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। आचार्य श्री ने कहा कि यह गोलोक धाम का प्रमुख उद्देश्य सड़क पर भटकने वाली, बीमार और बेसहारा गायों को सुरक्षित आश्रय और बेहतर जीवन देना है। आचार्य श्री ने बताया कि यह परियोजना केवल एक गौशाला नहीं है बल्कि इसे गोवंश के लिए एक पूर्ण अभयारण्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां गाय के पूरे जीवन चक्र और उसके महत्व को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। दूध गोबर और गोमूत्र के उपयोग को लेकर जागरूकता फैलाने के साथ-साथ गायों को प्राकृतिक और खुला वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
परियोजना से जुड़े गोलोक धाम के महामंत्री अमित निमोडिया, प्रशासनिक मंत्री और प्रवक्ता ने चेतन जैन निमोडिया बताया कि आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित करने की भी योजना है। यहां जैविक खेती, गोबर से खाद निर्माण, गोमूत्र आधारित उत्पाद और दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगाज़ जिससे यह केंद्र आर्थिक रूप से भी मजबूत बन सके।
यह केंद्र केवल पशु सेवा तक सीमित नहीं रहेगा
गोलोक धाम के अध्यक्ष देवेंद्र बाकलीवाल और प्रशासनिक मंत्री चेतन निमोड़िया ने बताया कि यह केंद्र केवल पशु सेवा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का भी माध्यम बनेगा। स्थानीय समिति के महामंत्री अमित जैन के अनुसार सदस्य इस पूरे प्रकल्प के संचालन और विस्तार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। आगामी माहों में आचार्य श्री के पर्यावरण संरक्षण को इस भूमि पर भी साकार करेंगे, उनके 1करोड वृक्ष लगवाने के संकल्प को भी पूरा कराने में सहयोग प्रदान करेंगे। क्षेत्र के प्रशासनिक मंत्री और प्रवक्ता चेतन निमोडिया के अनुसार इस परियोजना के तहत प्रथम चरण मे 300 गायों के संरक्षण की व्यवस्था की जा रही है, 15 फरवरी से शुरू इस चरण में 80 गायों का संरक्षण प्रारम्भ हो चुका है।













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