आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में सोमवार को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर…
झुमरी तिलैया। आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में 20अप्रैल को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। विशेष मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न को विशेष माना गया है। इसलिए इसका सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। थाली में भोजन को जूठा छोड़ना इसका अनादर करने के समान है। ऐसे ही कुछ संस्कारों की शुरूआत की गई है। रोजाना हजारों लोग रोटी के बगैर भूखे सो जाते हैं और कई लोग थाली में भोजन को जूठा छोड़ देते हैं। भोजन उतना ही लो, जितना खा सको ताकि बचा हुआ भोजन किसी दूसरे के काम आ सके।
अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले तो कोई भूखा नहीं रहेगा
इन्हीं सब उद्देश्यों को लेकर एक विद्यालय में शनिवार का दिन ‘भोजन जूठा न छोड़ें’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन एक भी बच्चा अपने टिफिन में भोजन को जूठा नहीं छोड़ता है। अगर भोजन बचता भी है तो उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी स्कूल की ही होतीहै। इतना ही नहीं इस स्कूल के सभी बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और टीचर उन्हें पूरा भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले तो कोई भूखा नहीं रहेगा। कहा जाता है कि जूठन छोड़ना पाप है, फिर भी बहुत लोग जूठन छोड़ते हैं।
आजकल अन्न पैसे से खरीदते हैं। इसलिये लोग उसकी तुलना पैसे से करते हैं। जूठन छोड़ देते हैं और उसे फेंक देते हैं किन्तु यह वास्तविकता नहीं है।
जल का भी उपयोग सीमित करना चाहिए
पैसे से अन्न खरीदा नहीं जा सकता। अन्न धरती अपनी छाती चीर कर देती है। कोई उसका अपमान करता है तो धरती दुःखी होती है और दूसरे जन्म में उसे अन्न के लिये तरसाती है। आज से सभी संकल्प लें कि थाली में जूठन नहीं छोड़ेंगे और इतना लो थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में। जल का भी उपयोग सीमित करना चाहिए। आधा गिलास भरकर रिश्तेदारों को, मित्रों को, परिवार वालों को देना चाहिए। जिससे कि अन्न और जल की बर्बादी ना हो, पक्षी को भी सकोरे में जल रखना चाहिए। पशुओं के लिए भी जल की व्यवस्था करना चाहिए। सेविंग में एवं स्नान आदि कार्यो में जल की बचत करना चाहिए। जल की सोचे कल की सोचे। कई लोगों ने संकल्प लिया।
मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव 22 अप्रैल को
समाज के पदाधिकारी ने कहा कि मुनि श्री धर्मसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव प्रथम चरण में 22 अप्रैल को प्रातः 6बजे ध्वजारोहण से प्रारंभ होगा। फिर नगर के इतिहास में प्रथम बार समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज एवं समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न की शुद्धि, अष्ट कुमारियों के द्वारा होगी। आचार्य छत्तीसी विधान होगा। मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। 23अप्रैल को द्वितीय चरण में प्रातः6बजे मांगलिक क्रियाएं, गुरु महापूजन, सांस्कृतिक प्रस्तुति, मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। यह झारखंड में प्रथम बार होगा। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन ने दी।













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