भारत सरकार की ओर से शास्त्रीय भाषा के रूप में घोषित प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अप्रैल तक त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया जा रहा है। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…
ललितपुर। भारत सरकार की ओर से शास्त्रीय भाषा के रूप में घोषित प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अप्रैल तक त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर प्रागैतिहासिक एवं पवित्र तीर्थस्थल नवागढ़ में आयोजित होगा। जहाँ देशभर से विद्वान, शिक्षक एवं साधक सहभागिता करेंगे। प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन के महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि 12 अप्रैल प्रातः 8 बजे उद्घाटन सत्र एवं 14 अप्रैल दोपहर 2 बजे समापन समारोह होगा। नवागढ़ तीर्थक्षेत्र के प्रचारमंत्री डॉ सुनील संचय ने बताया कि इस आयोजन में निदेशक ब्र. जयकुमार जैन निशांत, प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. ऋषभचंद फौजदार (दमोह), महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य (शाहगढ़) के साथश्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ के अध्यक्ष एड. सनतकुमार जैन (ललितपुर) एवं महामंत्री वीरचंद जैन नैकोरा की विशेष भूमिका रहेगी।
शिविर संचालन में इनकी भूमिका
शिविर के संचालन के लिए प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. शैलेष जैन (उदयपुर), डॉ आशीष दमोह, शिविर समन्वयक अरुण शास्त्री (जबलपुर), शिविर संयोजक सुनील शास्त्री (बड़गाँव) एवं क्षेत्र मैनेजर प्रवीण जैन (नवागढ़) सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।
इस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षक, विद्वान देशभर में ग्रीष्मकालीन समय में आयोजित होने जा रहे प्राकृत शिविरों में शिक्षण प्रदान करेंगे।
निदेशक ब्र. जयकुमार निशांत ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राकृत भाषा केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। इस शिविर के माध्यम से हम नई पीढ़ी को इस अमूल्य धरोहर से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।













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