ज्ञान जब भी जहां से भी मिले प्राप्त कर लेना चाहिए। कुमति ज्ञान और सुमित ज्ञान के साथ ज्ञान आठ प्रकार का होता है। अवधि ज्ञान के साथ कुअवधिज्ञान भी होता है।यह उद्गार देवोदय तीर्थ देवगढ़ में मुनि श्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर…
अशोक नगर। ज्ञान से सब कुछ जाना जा सकता है इसके लिए भी ज्ञान प्राप्त करना होगा। ज्ञान जब भी जहां से भी मिले प्राप्त कर लेना चाहिए। कुमति ज्ञान और सुमित ज्ञान के साथ ज्ञान आठ प्रकार का होता है। अवधि ज्ञान के साथ कुअवधिज्ञान भी होता है।यह उद्गार देवोदय तीर्थ देवगढ़ में मुनि श्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विनय करने से ज्ञान सहजता से प्राप्त हो जाता है। जब ज्ञान प्राप्त करने की बात आई तो श्री रामचन्द्र जी ने लक्ष्मण जी को रावण के पास ज्ञान प्राप्त करने के लिए भेज दिया लेकिन, रावण कुछ नहीं बोला तब श्री राम ने कहा कि ज्ञान विनय के साथ आता है और श्री लक्ष्मण जी ने रावण से युद्ध भूमि में ज्ञान प्राप्त किया। ये कहीं भी कभी भी मिल सकता है। इस दौरान जैन समाज अशोक नगर द्वारा वेदी प्रतिष्ठा के लिए श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुनि संघ के चरणों में निवेदन कर आगमन आग्रह
जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने देवगढ़ से लौटकर बताया कि मुनिश्री सुधासागरजी के अशोकनगर जिले से निकले की संभावना को देखते हुए श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मंदिर की वेदी प्रतिष्ठा के साथ ही गांव मंदिर एवं पार्श्वनाथ मंदिर की वेदी प्रतिष्ठा का निवेदन प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के साथ जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री विजय धुर्रा, संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, मनीष वरखेडा़, नीलेश टिकंल, एनएस हेमंत टडैया, प्रदीप कांसल, मनोज जैन लल्ला, प्रदीप कडरया, आस्तिक जैन सहित सभी सदस्यों ने श्रीफल भेंटकर किया।
सत्य को जानकर सत्य नहीं कह पाते
मुनि श्री ने कहा कि सत्य तो सत्य ही होता है। आज वर्तमान में सत्य को जानकर सत्य नहीं कह पाते तो कोई बात नहीं। मौन रहना भी सत्य का समर्थन समझना चाहिए। दुष्टजनों के समाने सत्य नहीं बोल पाने पर गिलानी नहीं करना चाहिए। दुष्ट जनो के समाने मौन रहने पर वे आपको मूर्ख मानकर छोड़कर चले जाएंगे। मेरे मौन रहने से सब हमें मूर्ख ही समझ रहे हैं। मूर्ख के समाने सत्य बोलने से वह आप पर हमला कर सकता है। ऐसे समय में मौन रहना ही ठीक है। अराजक तत्वों के सामने मौन रहना ही ठीक है क्योंकि, वे कुछ भी कर सकते हैं।
मध्यप्रदेश में प्रवेश पर नगर में मंदिरों की हो प्रतिष्ठा
इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल ने कहा कि अशोक नगर में ऐतिहासिक शाही पंच कल्याणक महा महोत्सव हुआ। अब हम सब उम्मीद कर रहे हैं। जब आपका मध्य प्रदेश में प्रवेश हो तो नगर के सभी जिनालय में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव मनाए जाने का हम सब को सौभाग्य प्राप्त हो ये निवेदन लेकर आए हैं। इस दौरान प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया जी ने कहा कि समाज पूरी ताकत लगाकर प्रयास करती रहेगी तो हो सकता है गुरु जी के चरण फिर एक बार अशोक नगर जिले की ओर बढ़ जाएं। सबसे अच्छा तो ये है कि पूरा जिला एक साथ प्रयास करें।













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