मुरादाबाद के टीएमयू में पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित ने लीडरशिप टॉक में युवाओं को संविधान, न्याय और राष्ट्र निर्माण पर प्रेरित किया। उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका, शिक्षा और तीन तलाक जैसे अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। – पढ़िए मुरादाबाद से श्याम सुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट
मुरादाबाद स्थित के ऑडिटोरियम में “फ्रॉम कोर्टरूम टू नेशन बिल्डिंग” विषय पर लीडरशिप टॉक सीरीज़ का आयोजन हुआ। इस खास मौके पर देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

युवाओं को दिया बड़ा संदेश
जस्टिस ललित ने साफ कहा कि न्यायपालिका सिर्फ फैसले देने का माध्यम नहीं, बल्कि संविधान और समाज की संरक्षक भी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करें और नैतिक नेतृत्व अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
संविधान की गहराई को समझाया
उन्होंने अनुच्छेद 31ए, 31बी, 31सी और 21 की विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि कैसे इन प्रावधानों ने देश में समानता, न्याय और विकास को मजबूती दी। उन्होंने यह भी बताया कि अनुच्छेद 21 को समय के साथ गरिमापूर्ण जीवन, पर्यावरण और पशु संरक्षण से जोड़ा गया है।
तीन तलाक और शिक्षा पर अहम बात
जस्टिस ललित ने तीन तलाक कानून को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को सम्मान और अधिकार मिला है। साथ ही उन्होंने निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।
आर्थिक और सामाजिक बदलाव की बात
उन्होंने देश की आर्थिक यात्रा—राष्ट्रीयकरण से उदारीकरण तक—का जिक्र करते हुए बताया कि इससे भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ। साथ ही आरक्षण व्यवस्था को सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम बताया।
टीएमयू की उपलब्धियों से हुए प्रभावित
कार्यक्रम के बाद टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने जस्टिस ललित का सम्मान किया। अक्षत जैन ने यूनिवर्सिटी की उपलब्धियों की जानकारी दी, जिस पर उन्होंने सराहना जताई।
छात्रों के सवाल, जस्टिस ललित के जवाब
टॉक के दौरान छात्रों ने कई सवाल भी पूछे, जिनका जस्टिस ललित ने सरल और प्रेरक अंदाज़ में जवाब दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और फैकल्टी मौजूद रहे।













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