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संसार में सबसे मूल्यवान स्वयं का मूल्य : आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने में दर्शन किए


आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महामुनिराज सेनवासा पहुँचे। जहाँ मंदिर जी के दर्शन कर धर्म सभा में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए ने कहा कि आश्चर्य तो तब होता है, जब सब चीजों का मूल्य बढ़ रहा है और आदमी का मूल्य घटता जा रहा है। सेनवासा/कोडरमा से राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर…


सेनवासा/कोडरमा। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महामुनिराज सेनवासा पहुँचे। जहाँ मंदिर जी के दर्शन कर धर्म सभा में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए ने कहा कि आश्चर्य तो तब होता है, जब सब चीजों का मूल्य बढ़ रहा है और आदमी का मूल्य घटता जा रहा है। आज के समय में सबसे सस्ता यदि कुछ है, तो वह है-आदमी और उसकी जान। आज का आदमी स्वार्थ और पैसे में ही बिक रहा है। पैसा सुविधा दे सकता है, परन्तु सुख नहीं। शरीर सुख तो मिला, पर मन की शांति खत्म हो गई। मैं मानता हूँ, धन कुछ हो सकता है, कुछ-कुछ हो सकता है, बहुत कुछ हो सकता है, पर धन सब कुछ नहीं हो सकता। हमने यही गलती की धन को ही सब कुछ मान लिया और स्वयं से बेखबर हो गए।

कभी परमात्मा से कुछ मांगना पड़े तो पैसा नहीं- पुण्य मांगना, बुद्धि नहीं – नसीब मांगना क्योंकि, अच्छे-अच्छे बुद्धिमानों को हमने नसीब वालों के यहां पानी भरते देखा है। अकबर नसीब वाला था और बीरबल बुद्धिमान। आप क्या हो? मेहनत से कमाइए, पसीने की कमाई खाइये। पाँव उतने ही फैलाइये, जितनी लम्बी चादर हो। ऋण लेकर झूठी शान-शौकत से बचें और शुकून से जीवन जिएं।

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