मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भोजशाला के जैन धरोहर, जैन गुरुकुल एवं जैन मंदिर होने के संबंध में जैन समाज के अधिकारों को लेकर समाज श्रेष्ठी सलेकचंद जैन (दिल्ली) द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर विस्तृत एवं सफल सुनवाई हुई। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में भोजशाला के जैन धरोहर, जैन गुरुकुल एवं जैन मंदिर होने के संबंध में जैन समाज के अधिकारों को लेकर समाज श्रेष्ठी सलेकचंद जैन (दिल्ली) द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर विस्तृत एवं सफल सुनवाई हुई। सलेकचंद जैन ने बताया कि इस पीआईएल का मध्य प्रदेश सरकार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिवक्ताओं द्वारा कड़ा विरोध किया गया। इसके बावजूद माननीय न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 2 अप्रैल 2026 तक पीआईएल पर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रतिवादियों (Respondents) को लिखित आपत्तियां भी निर्धारित तिथि से पूर्व प्रस्तुत करने को कहा गया है।
खंडपीठ ने भोजशाला पर जैन अधिकार के दावे से संबंधित इस पीआईएल को अन्य संबंधित याचिकाओं के साथ संलग्न (कनेक्ट) भी कर दिया है। आज की सुनवाई विशेष रूप से जैन अधिकार से संबंधित पीआईएल पर केंद्रित रही।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर (दिल्ली) ने जैन पक्ष की ओर से प्रभावी एवं विस्तृत दलीलें प्रस्तुत कीं। सुनवाई के दौरान प्रिया जैन (इंदौर) भी न्यायालय में उपस्थित रहीं।
राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह भी उल्लेखनीय है कि सर्वे के दौरान जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों एवं यक्ष-यक्षिणियों की प्रतिमाओं के खंडित अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिनका भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट में जैन धर्म से संबंधित उल्लेख नहीं किया है। इसके अतिरिक्त एक सप्तफणी कैनोपी, जो संभवतः भगवान पारसनाथ, धरणेन्द्र या पद्मावती देवी से संबंधित हो सकती है, उसका भी एएसआई द्वारा जैन संदर्भ में उल्लेख नहीं किया गया। इसे अन्य समाज द्वारा वासुकी नाग के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज की सुनवाई की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उक्त पीआईएल को न्यायालय द्वारा स्वीकार (Admitted) कर लिया गया है तथा प्रतिवादियों से इस पर जवाब एवं लिखित आपत्तियां मांगी गई हैं।













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