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संसारी के जन्म दिन और तीर्थंकरों के जन्म कल्याणक मनाए जाते हैं : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ का मंगल विहार 


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित श्री चंद्रप्रभ जिनालय सेक्टर 10 मालवीय नगर में विराजित हैं। आचार्य संघ सान्निध्य में श्री आदिनाथ जयंती विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाई गई। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर…


जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित श्री चंद्रप्रभ जिनालय सेक्टर 10 मालवीय नगर में विराजित हैं। आचार्य संघ सान्निध्य में श्री आदिनाथ जयंती विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाई गई। मालवीय नगर जैन समाज अध्यक्ष हरकचंद लुहाड़िया एवं रामपाल जैन मंत्री ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ संघ सानिध्य में श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन 12 मार्च को श्री आदिनाथ जयंती अंतर्गत प्रातः श्री आदिनाथ भगवान का नित्य अभिषेक एवं शांति धारा पुण्यार्जक परिवार द्वारा कर श्री आदिनाथ भगवान एवं प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर धर्मसभा में श्रीजी का महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा हुई। दोपहर को आचार्य संघ 35 पिच्छी का मंगल विहार मालवीय नगर से 6 किमी होकर रात्रि विश्राम प्रायमरी आदर्श विद्या मंदिर जवाहर नगर हुआ। 13 मार्च को सुबह मंगल विहार कर आहारचर्चा राणा जी की नसिया खानिया में होगी।

अभिषेक करना देखने से कर्मों की निर्जरा होती है

धर्मसभा में मुनि श्री भुवनसागर जी के उपदेश हुए। मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने प्रवचन में परिवार की एकता, प्रतिदिन मंदिर जाना अभिषेक करना देखने से कर्मों की निर्जरा होती है। जिनालय से सकारात्मक ऊर्जा ,जीवन में सुख शांति और पुण्य का आश्रव प्राप्ति होती है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि श्री भगवान ऋषभदेव के जन्म के पूर्व भोग भूमि थी कल्पवृक्ष थे। उनसे प्राणी जो भी इच्छा कामना करते थे। वह वस्तु मिल जाती थी। देवलोक में कंठ में अमृत झरता था। इस कारण उन्हें भूख प्यास का अनुभव नहीं होता था। आदिनाथ भगवान के जन्म के बाद उन्होंने जीवन यापन करने के लिए प्रजा को असि ,मसि, कृषि, शिल्प ,कला और वाणिज्य का उपदेश दिया। पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी के माध्यम से अंक और लिपि कला का ज्ञान दिया। आचार्य श्री ने बताया कि जीवन का निर्माण देव शास्त्र और गुरुओं के उपदेश से, संयमित, अनुशासित जीवन संस्कार से निर्मित होता है।

आचार्यश्री से आगमन का निवेदन 

इसी से जीवन से निर्वाण अर्थात सिद्धालय की प्राप्ति होगी। संसारी प्राणियों का जन्म दिन मनाया जाता हैं किंतु जो तीर्थंकर, महापुरुष होते हैं, उनके जन्म कल्याणक जन्म जयंती मनाई जाती हैं। मालवीय नगर जैन समाज अध्यक्ष हरकचंद लुहाड़िया एवं रामपाल जैन मंत्री ने बताया कि आचार्य संघ के प्रवास से काफी धर्म प्रभावना हो रही हैं। अनेक कॉलोनी मंदिरों के प्रतिनिधि आचार्य श्री से आगमन का निवेदन कर रहे हैं।

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