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अष्टद्रव्य की पूजा से होती है ग्रह बाधा दूर: आचार्यश्री निर्भयसागर जी ने बताया पूजा की महत्ता


आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज बड़ा जैन मंदिर महरौनी में संघ सहित एक सप्ताह से विराजमान हैं। प्रतिदिन 8.30 बजे मंगल प्रवचन होते हैं। बुधवार को आचार्य श्री ने प्रवचन के दौरान कहा कि श्रद्धा सहित की गई भगवान की पूजा भक्ति आराधना से ग्रहों की शांति स्वयं हो जाती है। महरौनी से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर…


महरौनी। आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज बड़ा जैन मंदिर महरौनी में संघ सहित एक सप्ताह से विराजमान हैं। प्रतिदिन 8.30 बजे मंगल प्रवचन होते हैं। बुधवार को आचार्य श्री ने प्रवचन के दौरान कहा कि श्रद्धा सहित की गई भगवान की पूजा भक्ति आराधना से ग्रहों की शांति स्वयं हो जाती है। किसी प्रकार के रत्न धारण करने की जरूरत नहीं होती है। भगवान के सामन अष्ट द्रव्यों से की गई पूजा नौ ग्रहों की शांति कर देती है। इसीलिए ग्रहों की शांति के लिए भक्ति आराधना की जाती है। भगवान की पूजा चावल अर्थात अक्षत और मोती चढ़ाकर करने से चंद्र ग्रह की, रक्त चंदन से सूर्य ग्रह की, केसर से मंगल ग्रह की, इलायची पिस्ता से बुध ग्रह की, बादाम पीली चटक या श्रीफल से गुरु ग्रह की, नारियल की चटक से शुक्र ग्रह की, कमलगट्टा से शनि ग्रह की एवं लौंग से राहु केतु ग्रह की बाधा दूर होती है।

इसीलिए जैन धर्मानुयायी अष्ट द्रव्यों से पूजा करते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि जब रत्न धारण करने से ग्रह बाधा दूर हो सकती है तो रत्न और चावल आदि द्रव्यों को चढ़कर परमात्मा की पूजा करने से भी ग्रह बाधा दूर हो सके। परिग्रह वालों को ग्रह लगते हैं। परिग्रह से रहित दिगंबर मुनि को कोई ग्रह नहीं लगते हैं और ना उन्हें नौ ग्रहों की बाधा परेशान करती है बल्कि जिनको ग्रह बाधा परेशान कर रहे हो उनकी वह ग्रह बाधा दूर हो जाती है।

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