हम गुरुओं और साधु-संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते। हम गुरुओं को मानते तो हैं, पर उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, जबकि गुरु वाणी के बिना हमारा उद्धार संभव नहीं है। जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण दिवस पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। पढ़िए मनोज जैन नायक की विशेष रिपोर्ट…
मुरैना (मनोज जैन नायक)। हम गुरुओं और साधु-संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते। हम गुरुओं को मानते तो हैं, पर उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, जबकि गुरु वाणी के बिना हमारा उद्धार संभव नहीं है। जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण दिवस पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए।
गुरु की आज्ञा का पालन ही आत्मकल्याण का आधार
आचार्य श्री ने कहा कि जैन दर्शन में गुरु-आचार्यों को मोक्ष मार्ग का मार्गदर्शक मानकर सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु की आज्ञा की अवहेलना सम्यक ज्ञान और चारित्र की हानि का कारण बनती है, जिससे आत्मा का विकास रुक जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु की अवज्ञा से शिष्य की साधना निष्फल हो सकती है, आध्यात्मिक पतन हो सकता है और कर्मों के बंधन के कारण मोक्ष मार्ग में बाधा उत्पन्न होती है। गुरु का अपमान करना गंभीर पाप कर्म है, जो जीव को निम्न गति की ओर ले जा सकता है।
गुरु-शिष्य परंपरा में विश्वास आवश्यक
आचार्य श्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में विश्वास की कमी से ज्ञान मार्ग में अंधकार छा जाता है और सही-गलत की पहचान समाप्त हो जाती है। यदि शिष्य गुरु की आज्ञा का पालन नहीं करता, तो कठोर तपस्या भी निरर्थक हो जाती है। उन्होंने कहा कि गुरु के प्रति अविश्वास या अवज्ञा से सम्यक दर्शन प्रभावित होता है, जो मोक्ष की पहली सीढ़ी है। गुरु के अनुशासन में न रहने से शिष्य के चरित्र में भी दोष उत्पन्न होते हैं।
गुरु कृपा से ही जीवन सफल – आचार्य श्री
आचार्य श्री ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आज जो कुछ भी हैं, वह अपने गुरु आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी एवं आचार्य श्री विपुलसागर जी महाराज के आशीर्वाद से ही हैं।
20वां आचार्य पदारोहण दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया
सकल दिगंबर जैन समाज, मुरैना द्वारा आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज का 20वां आचार्य पदारोहण दिवस विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में मांगलिक क्रियाओं के साथ जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और सुख-समृद्धि की कामना के साथ भक्तिमय अनुष्ठान संपन्न किए।
विधान, पूजन और भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन
कार्यक्रम के अंतर्गत श्री महावीर स्वामी विधान में अर्घ्य समर्पित किए गए। तत्पश्चात आचार्य श्री का अष्टद्रव्यों से पूजन कर उनकी महिमा का गुणगान किया गया तथा दीर्घायु की कामना की गई। बालिका मंडल एवं महिला मंडल द्वारा अष्टद्रव्यों से भक्ति भावपूर्वक पूजन कर समस्त मुनिराजों को अर्घ्य समर्पित किए गए। गुरु भक्तों ने संगीत की मधुर धुन एवं जैन भजनों पर नृत्य कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक, पाद प्रक्षालन और सम्मान
इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। श्रावक श्रेष्ठियों ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट किए। धर्मसभा का संचालन पूर्व प्राचार्य महेन्द्रकुमार शास्त्री, संजय शास्त्री, अजय भैयाजी एवं नवनीत शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चार के साथ किया गया।
निकलेगी भगवान महावीर की भव्य रथयात्रा
भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर प्रातः श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी।
इस रथयात्रा में आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज, मुनि श्री भूदत्तसागर जी महाराज, मुनि श्री सुदत्तसागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री चंद्रदत्तसागर एवं क्षुल्लक श्री यशोदत्तसागर महाराज सान्निध्य प्रदान करेंगे।
भव्य शोभायात्रा और धार्मिक आयोजन रहेंगे आकर्षण
भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को रथ पर विराजमान कर नगर के प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो पुनः बड़े जैन मंदिर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित होगी। मंदिर में भगवान को पाण्डुक शिला पर विराजमान कर कलशाभिषेक किया जाएगा। इसके पश्चात सामूहिक वात्सल्य भोज का आयोजन होगा। रात्रि में भगवान महावीर के बालरूप का पालना झुलाया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।













Add Comment