दूसरों की छोटी-छोटी गलतियां दिख जाती हैं। हम अपनी ग़लतीया नहीं देखते। अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए सबसे पहले हमें अपनी गलती को देखने की कला सिखाना होगी। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर…
अशोकनगर। दूसरों की छोटी-छोटी गलतियां दिख जाती हैं। हम अपनी ग़लतीया नहीं देखते। अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए सबसे पहले हमें अपनी गलती को देखने की कला सिखाना होगी। यह उद्गार सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमसे दूसरे लोगों को बहुत लाभ हो रहा है लेकिन, स्वयं का कुछ नहीं हो पा रहा। ये जितने ज्योतिष होते हैं वह दूसरों के भविष्य को बता रहे हैं। डॉक्टर दुनिया की चिकित्सा कर रहे हैं लेकिन, स्वयं का उनसे इलाज होता ही नहीं है। मुनिश्री ने कहा कि जब-जब ज्ञान करने का उद्देश्य आजीविका रहेगा तो आप स्वयं के लिए कुछ नहीं कर पाए। जब-जब भी पूर्व कर्म कर उसके बदले दुनिया की सुख सुविधा ख्यति लाभ पूजा मांग और वस्तुता उसे स्वयं के किये कर्म से उसे सब कुछ मिला लेकिन, उसके धर्म करने के भाव नहीं होंग।े रावण ने रहने को सोने के लंका चाहीं और मिली। रावण ने पूर्व भव में बहुत सेवा की इसके कारण उसे बज वृषभ नारायण सिंहासन मिला। रावण जैसी भक्ति आज तक संसार में किसी ने नहीं की। वह भक्ति करते समय शीश काट-काट कर चढ़ा देता है। भक्ति करते समय अपने हाथ की नश को बीड़ा पर चढ़ा देता है। सब जानते हैं मनुष्य पर्याय मिली है, दान पुण्य करना अच्छी चीज है।
अमृत का गिलास भरा पड़ा है फिर भी नहीं पी रहा
मुनिश्री ने कहा कि अमृत का गिलास भरा पड़ा है फिर भी नहीं पी रहे। सब कुछ जान कर भी अमृत से दूर हैं। तू जान रहा हैं फिर भी नहीं कर पा रहा। गुटखा तंबाकू बहुत ख़राब है, ये नुकसान करता है। शराब बहुत गंदी है। ये व्यक्ति को बर्बाद कर देगी। घर परिवार उजड़ जाते हैं बाल बच्चे अनाथ हो जायेंगे। फिर भी शराब पीये जा रहा है। रावण जैसा ज्ञानी गलती किये जा रहा है। उस समय रावण बराबर ज्ञानी कोई नहीं था। रावण बराबर धनी शक्तिशाली कोई नहीं था जिसके घर में सैकड़ों अप्सरा जैसी रानीया बैठी हैं फिर भी रावण के परिणाम बिगड गये। अर्धचक्री की रानी या परम धर्मात्मा सुशील होती है। बहुत ही सुंदर है रूपवान होती है। मंदोदरी कहती हैं फिर भी आपके परिणाम बिगड रहे हैं। रावण कहता है मंदोदरी क्या ये मैं नहीं समझ रहा। फिर भी खिंचा चला जा रहा। पूर्व भव में भगवान की भक्ति करते समय धन दौलत सुख भोग विलास के लिए मांगी। इसलिए आज उनके भाव धर्म करने के नहीं हो रहे। ऐसे ही हमारी स्थिति है। यहां आपके पास धन दौलत सब कुछ है। फिर भी आपके भाव धर्म करने के नहीं होते चाहिए।
’भगवान से दूर रहने के कारणों को आप स्वयं जांचे
मुनिश्री ने कहा कि आप लोग भी किन कारणों से अधर्म कर रहे हो। किस-किस के कारण आप धर्म छोड़ रहे हो। धन के लिए यही धन आपके लिए बर्बादी का कारण बनेगा। जो-जो कार्य आपने बड़ांे के मना करने पर किया भी आप कर रहे हैं। यही कारण आपको जगत में पीछे ले जायेंगे, जिन-जिन कार्यों के कारण आप भगवान से दूर हो रहे।
इन्द्र प्रतिष्ठा के साथ होंगी पात्र शुद्धि मंडल शुद्धि
जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मंगलवार अशोक नगर के लिए बहुत ही पावन पवित्र दिवस होगा। जब हम शहरवासी मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य एवं प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच बैठकर जगत कल्याण की कामना के लिए विश्व शांति महायज्ञ करने जा रहे हैं। महा महोत्सव का शुभारंभ ध्वजा रोहण सभा मंडप के उद्घाटन के साथ होगा। मंगलवार सुबह श्री जी को रजत रथ यात्रा पालकी विमान जी के साथ घटयात्रा सुबह सात बजे सुभाष गंज मैदान से प्रारंभ होकर विद्या सागर द्वार, भगवान महावीर मार्ग, गांधी पार्क मंडी रोड होते हुए जो मंडी स्थित अयोध्या नगरी में धर्म सभा में बदलेगी। जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक मनोज रन्नौद, उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला थूवोनजी, अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास, विपिन सिंघई ने सभी से सदा रथयात्रा बढ़ चढ़ कर भाग लेने का निवेदन किया है।













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