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जैन धर्म में शाकाहार का आधार : विराट कोहली अपना रहे हैं शाकाहारी डाइट


विश्व कप में फाइनल मुकाबला 19 नवंबर को खेला जाना है। इस मुकाबले में सबकी निगाहें विराट कोहली पर टिकी हैं। सेमीफाइनल में विराट ने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा था। विराट कोहली अब वेगन डाइट को फॉलो कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डाइट से विराट के खेल में फायदा हुआ है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। विश्व कप में फाइनल मुकाबला 19 नवंबर को खेला जाना है। इस मुकाबले में सबकी निगाहें विराट कोहली पर टिकी हैं। सेमीफाइनल में विराट ने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा था। विराट कोहली अपनी फिटनेस को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। मीडिया रिपोर्ट की मुताबिक, उन्होंने पिछले एनिमल प्रोटीन लेना बंद कर दिया है। वहीं, अपनी फेवरेट बिरयानी, बटर चिकन और अंडे के साथ डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध, पनीर को खाना भी बंद कर दिया है। कुल मिलाकर वे वेगन डाइट को फॉलो कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डाइट से विराट के खेल में फायदा हुआ है। बता दें, कि उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी इसी डाइट को फॉलो करती हैं। विराट का मानना है कि इससे उनका खेल बेहतर हुआ है। कोहली की मौजूदा डाइट में प्रोटीन शेक, वेजिटेबल और सोया शामिल है। उन्होंने अंडा और डेयरी प्रोडक्ट खाना छोड़ दिया है। सूत्रों के मुताबिक, “कोहली अब ज्यादा मजबूत महसूस कर रहे हैं क्योंकि उनकी पाचनशक्ति बढ़ गई है. उन्हें अब मीट, अंडा या डेयरी प्रोडक्ट अच्छे नहीं लगते।” विराट कोहली ने कहा कि वह खाने के शौकीन हैं और कार्बन फुटप्रिंट छोड़े बिना उस तरह के भोजन का आनंद लेना चाहते हैं जो उन्हें पसंद है। विराट कोहली, जिन्होंने 2018 में अपने शरीर में कुछ तकलीफ के कारण मांसाहार से परहेज किया था, बताते हैं, “मुझे अपनी रीढ़ की समस्या के कारण कुछ परेशानी महसूस हुई। उसकी वजह से मैंने 2018 से मांस खाना बंद कर दिया है।”

जैन दर्शन में शामिल शाकाहार

जैन दर्शन किसी भी जीवित प्राणी को शारीरिक या विचारों में भी नुकसान नहीं पहुंचाने में विश्वास रखता है,जाने में या अनजाने में। वे सब्जियों की कोई भी जड़ नहीं खाते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे उनका समूल नाश हो जाता है । वे सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद न खाते हैं और न ही पीते हैं क्योंकि उनका मानना है कि उस समय पर्यावरण में विभिन्न सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं। वे बोलते समय अपना मुंह भी ढक लेते हैं क्योंकि उनका मानना है कि मुंह से निकलने वाली गर्म सांस हवा में मौजूद सूक्ष्म जीवों को मार देती है!

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