बड़वानी में क्षुल्लक दीक्षा उपरांत क्षुल्लक श्री विश्वउत्तीर्ण सागर जी महाराज ने सभी से क्षमा याचना कर णमोकार मंत्र सुनते हुए देह परिवर्तन किया। उनका डोला शुक्रवार सुबह 6 बजे निकाला गया। यह संल्लेखना आर्यिका विकुंदन श्री के सानिध्य में हुई। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रदान की यह खबर…
धामनोद। बड़वानी में क्षुल्लक दीक्षा उपरांत क्षुल्लक श्री विश्वउत्तीर्ण सागर जी महाराज ने सभी से क्षमा याचना कर णमोकार मंत्र सुनते हुए देह परिवर्तन किया। उनका डोला शुक्रवार सुबह 6 बजे निकाला गया। यह संल्लेखना आर्यिका विकुंदन श्री के सानिध्य में हुई। मनीष जैन ने बताया कि गांगली वाले काला परिवार के सबसे छोटे भाई विमलचंद काला जो सात तलाई में निवासरत थे। उनका स्वास्थ्य खराब होने से शुक्रवार को बड़वानी में विराजित आर्यिका मां विकुंदन श्री और बावनगजा जी दर्शनार्थ आए थे। पूरे सचेत अवस्था में माताजी के समक्ष सभी से क्षमा याचना की और पूरे परिवार ने उन्हें क्षुल्लक दीक्षा की स्वीकृति प्रदान की।
तब पूज्य माताजी ने आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी, श्रमण मुनि विवर्धन सागर जी, आर्यिका क्षमा श्री से आशीर्वाद प्राप्तकर क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की और क्षुल्लक श्री विश्व उत्तीर्ण सागर जी नामकरण किया गया। उन्होंने पूरे समाज के समक्ष प्रतिक्रमण और नमोकार मंत्र सुनते हुए बड़े ही शांत रूप में अपनी देह त्याग दी। जिनका डोला 29 अगस्त को प्रातः 6 बजे फूलीबाई जैन धर्मशाला से निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित हुए।













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