मुरैना की बेटी और अजमेर निवासी साधिका शांतमति (पूर्व नाम शारदा देवी जैन) ने गाजियाबाद में आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी के सान्निध्य में सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण प्राप्त किया। पढ़िए मनोज जैन की पूरी रिपोर्ट…
मुरैना नगर के उपरोचियां परिवार में 1953 में जन्मी शारदा देवी का पालन-पोषण धार्मिक वातावरण में हुआ। 1972 में उनका विवाह अजमेर निवासी महेशचंद जैन से हुआ और उनके तीन पुत्र एवं एक पुत्री हुई।
कुछ समय से अस्वस्थ रहने पर उन्होंने संयम मार्ग को अपनाने का निश्चय किया। 18 अगस्त 2025 को गाजियाबाद के सूर्य नगर में चातुर्मासरत आर्यिका पूर्णमति माताजी के सान्निध्य में उन्होंने श्रीफल समर्पित कर संयम की साधना स्वीकार की। 19 अगस्त को दस प्रतिमाओं के व्रत लेकर उनका नामकरण ‘शांतमति’ हुआ।
साधिका शांतमति ने अन्न का त्याग कर केवल तरल आहार ग्रहण किया और अंत समय में चारों प्रकार के आहार का त्याग कर दिया। शुक्रवार 29 अगस्त की सुबह 09.35 बजे पूर्ण चेतना में णमोकार मंत्र का स्तवन करते हुए उन्होंने समाधि मरण प्राप्त किया।
उनका अंतिम संस्कार उसी दिन गाजियाबाद के सूर्य नगर में दोपहर 12.20 बजे किया गया, जिसमें उनके पति महेशचंद जैन ने मुखाग्नि दी।
जैन समाज में गहरी श्रद्धा और भावुकता का वातावरण
साधिका शांतमति के समाधि मरण की खबर से जैन समाज में गहरी श्रद्धा और भावुकता का वातावरण है। मुरैना और अजमेर सहित गाजियाबाद के जैन समाजजनों ने इसे आत्मा की सर्वोच्च साधना बताया और श्रद्धासुमन अर्पित किए। समाज के लोगों का कहना है कि उनका संयम और तप साधकों के लिए प्रेरणास्त्रोत रहेगा।













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