श्री दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मन्दिर जी में सिद्ध चक्र मंडल विधान रचाया गया, जिसमें सभी समाजजनों ने अपनी सहभागिता दर्ज की। अष्टानिका पर्व के अंतर्गत प्रतिदिन कई कार्यक्रम आयोजित किये गये। पढ़िए विशेष सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…
सनावद। फागुन माह में मनाए जाने वाले अष्टानिका पर्व का शुभारंभ 1 मार्च फागुनशुदी अष्टमी से हुआ था जो कि 8 दिन तक चलकर 8 मार्च फागुन सुदी पूर्णिमा तक मनाया गया। इसके अंतर्गत श्री दिगम्बर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मन्दिर जी में सिद्ध चक्र मंडल विधान रचाया गया, जिसमें सभी समाजजनों ने अपनी सहभागिता दर्ज की।
अष्टानिका पर्व के अंतर्गत प्रतिदिन कई कार्यक्रम आयोजित किये गये। इसमें प्रातः 6.30 बजे से बड़ा मंदिर में पंचामृत अभिषेक तत्पश्चात नित्य पूजन, दोपहर 1 बजे से सिद्ध च्रक मंडल पूजन, शाम 7.15 बजे से गुरु भक्ति, रात्रि 8 बजे से संगीतमय आरती एवं रात्री 8.30 बजे से अचितन्य भैया के शास्त्र प्रवचन सहित अनेक कार्यक्रम आयोजित गए।

सन्मति जैन काका ने बताया कि अष्टानिका पर्व के समापन पर दोपहर में श्री 1008 सिद्धचक्र मंडल विधान के पूजन का समापन 1024 अर्घ्य चढ़ा कर किया गया। सिद्धचक्र विधान का महत्व बताते हुए ज्योति बाला धनोते, पुष्पा जैन ने बताया कि राजकुमारी मैना सुंदरी का विवाह कुष्ठ रोगी के साथ कर दिया गया था, राजकुमारी ने अष्टानिका पर्व में सिद्धचक्र विधान किया और गंधोदक को पति के साथ अन्य 700 कुष्ठ रोगियों पर डाला। इससे उनके रोग दूर हो गए। सिद्धों की आराधना एवं जिनाभिषेक के गंधोदक का इतना प्रभाव है, इसलिए जिसको भी जीवन में कोई कष्ट हो तो उन सभी का निवारण नित्य अभिषेक पूजन से किया जा सकता है।
इस अवसर पर सुनील पावणा, सुधीर जैन, प्रशांत जैन, हेमंत काका, कैलाश चौधरी, मंजुला भूच, शेफाली जैन, शुबोध बाई, लेखमाला जैन, अर्चना जैन, राजकुमारी जैन, भानु बाई जटाले, मनु बहनजी, सरोज बाई, साधना मुंसी, मधु भुच,रेखा जैन सहित कई समाजजन उपस्थित थे।













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