मुनि श्री सुयशसागर जी के प्रवचन प्रतिदिन प्रात 9 बजे छाबड़ा जी की नसिया गांधीनगर में हो रहे हैं। यहां पर बड़ी संख्या में धर्मानुरागी उपस्थित रहकर धर्म लाभ ले रहे हैं। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। जब तक जीव को संसार के सुख कीमती लग रहे हैं तब तक उसे सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, और सम्यक चारित्र की ना तो कीमत समझ में आएगी और ना ही इन त्रय रत्नोकी प्राप्ति हो पाएगी। यह उद्गार छाबड़ा जी की नसिया गांधीनगर में चातुर्मास कर रहे पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनिश्री सुयश सागर जी महाराज ने ग्रंथ राज पद्मपुराण की गाथाओं पर प्रवचन देते हुए व्यक्त किए। मुनि श्री ने आगे कहा कि संसार का वैभव नाशवान है और पर द्रव्यों पर दृष्टि संसार बढ़ाने वाली है।
इसलिए जीव को संसार से विरक्त होने के लिए परिग्रह एवं जड़ आभूषणों का त्याग कर चैतन्य आभूषणों को प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री के प्रवचन प्रतिदिन प्रात 9 बजे छाबड़ा जी की नसिया गांधीनगर में हो रहे हैं। धर्मसभा में तरुण भैया, संजय बाकलीवाल, डॉ.जैनेंद्र जैन, शांतिलाल बड़जात्या, महेश जैन डॉ.वंदना जैन आदि उपस्थित थे।













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