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अक्षय तृतीया पर्व पर हुआ आहारदान परंपरा का निर्वहन : मुनिश्री संघ की आहारचर्या बड़वाह में हुई 


आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री आदित्य सागरजी ससंघ चार पिच्छी अक्षय तृतीया पर्व (दान महिमा पर्व )पर मंगल आगमन हुआ। बड़वाह से पढ़िए संदीप जैन की यह खबर…


बड़वाह। आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री आदित्य सागरजी ससंघ चार पिच्छी अक्षय तृतीया पर्व (दान महिमा पर्व ) पर मंगल आगमन हुआ। आहार चर्या कि विधि किसी को भी मालूम न होने के कारण भगवान आदिनाथ को मुनि अवस्था में छः माह तक आहार नहीं मिला था। राजा श्रेयांस को पूर्व भव के स्मरण से आहार चर्या विधि का ज्ञान हुआ फिर राजा श्रेयांस ने मुनि आदिनाथ का पडगाहन कर नवधाभक्ति पूर्वक इच्छुक रस (गन्ने का रस ) से प्रथम आहार करवाया। जब से उस दिन का नाम अक्षय तृतीया पर्व पड़ा और दान की महिमा का प्रचलन प्रारंभ हुआ।

दान की महिमा का साक्षात् निर्वहन और धर्म प्रभावना के साथ आहार पुण्यार्जक श्रावक श्रेष्ठी प्रियंका संदीप चौधरी, रश्मि सुयश चौधरी परिवार द्वारा निज निवास पर मुनि श्री आदित्य सागरजी महाराज की आहार चर्या हुई। संघ के अन्य मुनि श्री सहज सागरजी की सुलोचना, प्रवीण जैन लब्धि जैन, मुनि अप्रमित सागरजी की स्वस्तिक सुधीर जैन कमलेश जैन एवं क्षुल्लक श्रेयस सागरजी की अनिता सुधीर जैन, सुयश जैन के निवास पर आहार चर्या हुई। सामायिक तपचर्या पश्चात् सायंकाल ससंघ का मंगल विहार इंदौर की ओर हुआ।

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