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तीर्थंकर माता की हुई गोद भराई : पंचकल्याणक महोत्सव में गर्भ कल्याणक की विधियां सम्पन्न


श्री दिगम्बर जैन मंदिर, लार के तत्वाधान में चर्या शिरोमणि, आध्यात्मिक संत आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के विशाल संघ सान्निध्य में ब्र. जय कुमार जी निशांत एवं ब्र. संजय भैया गुणाशीष के प्रतिष्ठाचार्यत्व में आयोजित श्री 1008 जिनेन्द्र पंचकल्याणक, मानस्तंभ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा, विश्वशांति महायज्ञ एवं रथोत्सव महोत्सव के अंतर्गत रविवार को गर्भ कल्याणक की उत्तरार्द्ध विधियां भव्यता के साथ सम्पन्न हुईं। पढ़िए मुकेश जैन की रिपोर्ट…


टीकमगढ़। श्री दिगम्बर जैन मंदिर, लार के तत्वाधान में चर्या शिरोमणि, आध्यात्मिक संत आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के विशाल संघ सान्निध्य में ब्र. जय कुमार जी निशांत एवं ब्र. संजय भैया गुणाशीष के प्रतिष्ठाचार्यत्व में आयोजित श्री 1008 जिनेन्द्र पंचकल्याणक, मानस्तंभ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा, विश्वशांति महायज्ञ एवं रथोत्सव महोत्सव के अंतर्गत रविवार को गर्भ कल्याणक की उत्तरार्द्ध विधियां भव्यता के साथ सम्पन्न हुईं।

पूजन, अभिषेक और हवन से हुआ शुभारंभ

प्रातःकाल से ही पात्र शुद्धि, अभिषेक, शांतिधारा, नित्य महापूजन एवं गर्भ कल्याणक पूजन सम्पन्न हुआ। विश्व शांति की कामना से हवन का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

सीमंतनी क्रिया में हुई माता की गोद भराई

दोपहर में सीमंतनी क्रिया के अंतर्गत तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की माता की गोद भराई की रस्म पूर्ण की गई। इस अवसर पर महोत्सव समिति एवं सैकड़ों महिलाओं ने भक्ति भाव से गोद भराई कर धर्म लाभ प्राप्त किया। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मानस्तंभ की भी विधि-विधान से शुद्धि की गई।

इस महोत्सव में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य सवाई चौधरी ज्ञानचंद्र जैन एवं शोभा जैन को प्राप्त हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता-पिता को गोद में उठाकर भक्ति नृत्य किया। बड़ागांव, खरगापुर, दरगुवा, लार सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए महिला मंडलों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट और संगीतमयी भक्ति

आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य शांतकुमार-विजय जैन परिवार को तथा शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य अजित जैन वैसा परिवार को प्राप्त हुआ।

राम कुमार एंड पार्टी की संगीतमयी प्रस्तुतियों के बीच पूजन, भक्ति एवं नृत्य का वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस अवसर पर महाआरती भी सम्पन्न हुई।

पंचकल्याणक आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया – आचार्य श्री

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा से परमात्मा बनने की पवित्र प्रक्रिया का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अरिहंत परमात्मा के दर्शन और वंदना से पूर्व जन्मों के कर्मों का क्षय होता है तथा गुरु सेवा से पाप कर्म नष्ट होकर पुण्य की वृद्धि होती है।उन्होंने आगे कहा कि समर्पण से बीज वृक्ष बनता है और बूंद सागर बन जाती है, उसी प्रकार जीव भी तप और साधना से परमात्मा बनता है। आचार्य श्री ने कहा कि सच्चा भक्त और गुरु का सच्चा सेवक सम्मान की इच्छा नहीं रखता, लेकिन उसकी भक्ति और सेवा के कारण वह स्वयं ही सम्मानित हो जाता है।

उन्होंने कहा कि भक्ति से मुक्ति मिलती है और सेवा का फल अवश्य प्राप्त होता है।

रात्रि में सजे महाराजा नाभिराय का दरबार

रात्रि में भगवान के माता-पिता का दरबार सजाया गया। इस दौरान 16 स्वप्नों का फल कथन, अष्ट देवियों एवं छप्पन कुमारियों द्वारा सेवा अर्पण, महाराजा नाभिराय का भव्य दरबार तथा राज्य व्यवस्था से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस भव्य आयोजन में शाहगढ़, ललितपुर, टीकमगढ़, बंडा, बुडेरा, हटा, इंदौर, बेंगलुरु, भोपाल, छतरपुर, घुवारा, बड़ागांव, बकस्वाहा, खरगापुर सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में महोत्सव समिति एवं उपसमितियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समागत अतिथियों एवं समाज के गणमान्यजनों का स्वागत किया गया तथा पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई।

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