श्री दिगंबर जैन मंदिर जनकपुरी ज्योतिनगर में चल रहे श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर के अवलोकनार्थ सांगानेर संस्थान के प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति रही। सात वर्ष आयुवर्ग में सुहांश जैन एवं आठ से बारह वर्ष के आयु वर्ग में गार्गी जैन को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…
जयपुर। श्री दिगंबर जैन मंदिर जनकपुरी ज्योतिनगर में चल रहे श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर के अवलोकनार्थ सांगानेर संस्थान के प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति रही। जनकपुरी शिविर संयोजक पदम जैन बिलाला ने बताया कि बुधवार को जनकपुरी में श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के कार्याध्यक्ष प्रमोद जैन पहाड़िया, संयुक्त मंत्री दर्शन बाकलीवाल, श्री श्रमण संस्कृति महिला महासभा भारत की राष्ट्रीय अध्यक्षा शीला जैन ड्योडा श्री दिगंबर जैन महिला महासमिति राजस्थान आँचल एवं सभी संभाग की अध्यक्ष शालिनी बाकलीवाल, कोषाध्यक्ष विद्युत लुहाड़िया, जयपुर शिविर प्रभारी दीपिका बिलाला, पुष्पा पदम बिलाला, आदिश्री जैन, पारस बिलाला ने मंगल दीप प्रज्वलन कर शिविर का शुभारंभ किया। मंगलाचरण किरण जैन ने प्रस्तुत किया। इसके पूर्व जनकपूरी जैन मंदिर समिति के अध्यक्ष बुद्धि प्रकाश छाबड़ा, मंत्री देवेंद्र कासलीवाल, कोषाध्यक्ष दिलीप चांदवाड़, शिविर संयोजक मिश्रीलाल काला, राजेन्द्र ठोलिया, राजकुमारी जैन, सुनीता भोंच, महिला मंडल अध्यक्षा अनिता बिंदायक्या, मंत्री सुलोचना जैन, युवा मंच के अध्यक्ष अमित शाह, मंत्री प्रतीक जैन ने सभी अतिथियों का तिलक माला दुपट्टा व साफा पहनाकर अभिनंदन किया।
जनकपुरी समाज की स्वाध्याय के प्रति लगन की सराहना
शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए शीला ड्योडा ने बताया कि 1993 में चार मंदिरों से शुरू हुआ शिविरों का सफ़र आज 63 तक पहुंचा है और इन शिविरों में अध्यापन के लिए मुनि श्री सुधासागर की परिकल्पना से संस्थान के माध्यम से विद्वान व विदुषियां उपलब्ध हो रही है। प्रमोद जैन पहाड़िया ने जनकपुरी समाज की स्वाध्याय के प्रति लगन की सराहना की। जैन आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हाइकू पर छोटे बच्चों द्वारा बनाए चित्रों की प्रदर्शनी का अतिथियों ने अवलोकन किया। सात वर्ष आयुवर्ग में सुहांश जैन एवं आठ से बारह वर्ष के आयु वर्ग में गार्गी जैन को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। सभी अतिथियों का पदम जैन बिलाला ने आभार माना। विदुषी रिया जैन, काजल जैन, मिनी जैन, साक्षी जैन, दर्शी जैन के अलावा ज्ञानचंद जैन, सोभाग अजमेरा, ताराचंद गोधा, महावीर बिंदायक्या, नवीन पांड्या, राकेश जैन आदि की गरिमामय उपस्थिति रही। विद्वान शिखरचंद जैन ने कुशल संचालन किया।













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