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वैराग्य की पराकाष्ठा क्षुल्लिका श्री सल्लेखना मति माताजी ने समतापूर्वक ली समाधि : निकली अंतिम मोक्ष यात्रा


शिक्षिका पद का परित्याग कर संयम पथ पर कदम बढ़ाने वाली क्षुल्लिका श्री सल्लेखना मति माताजी (पूर्व नाम मालतीबाई जैन, शिक्षिका – मालथौन/दिगौड़ा) ने मंगलवार को दोपहर 1:30 बजे महावीर विहार कॉलोनी टीकमगढ़ (मप्र) में समतापूर्वक समाधि मरण प्राप्त कर लिया है। टीकमगढ़ से पढ़िए, यह खबर…


टीकमगढ़। दीक्षा मात्र एक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का परम पावन मार्ग है। इसी उदात्त भावना को आत्मसात कर शिक्षिका पद का परित्याग कर संयम पथ पर कदम बढ़ाने वाली क्षुल्लिका श्री सल्लेखना मति माताजी (पूर्व नाम मालतीबाई जैन, शिक्षिका – मालथौन/दिगौड़ा) ने मंगलवार को दोपहर 1:30 बजे महावीर विहार कॉलोनी टीकमगढ़ (मप्र) में समतापूर्वक समाधि मरण प्राप्त कर लिया है। माताजी ने संसार से पूर्ण वैराग्य धारण करते हुए तीन दिवस तक जल का पूर्ण त्याग कर दिया था। वे पूर्ण शांति, संयम एवं आत्मध्यान में स्थित रहकर समाधि को प्राप्त हुईं। धन्य हैं वे आत्माएँ, जिन्हें अंतिम समय में समता पूर्वक सल्लेखना एवं समाधि मरण का परम सौभाग्य प्राप्त होता है।

अलौकिक दीक्षा से समाधि तक का सफर विगत 17 मई को समाधि सम्राट आचार्य श्री विराग सागर महाराज के परम प्रभावी शिष्य पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के विशेष आशीर्वाद से श्री चंद्रप्रभु जिनालय, महावीर विहार कॉलोनी में उनका अलौकिक दीक्षा समारोह हुआ था। आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के मंत्रोच्चार और आर्यिका श्री ओम श्री माताजी के कर-कमलों द्वारा उन्हें दीक्षा प्रदान कर नया संयमी नाम क्षुल्लिका श्री सल्लेखना मति माताजी दिया गया था। दीक्षा के बाद से ही माताजी की सल्लेखना साधना अत्यंत दृढ़ता और आत्म-लीनता के साथ चल रही थी, जिसका आज दोपहर को हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में मंगल समापन हुआ। समाज सेवी मुकेश जैन लार ने बतलाया कि पूज्य माताजी की अंतिम मोक्ष यात्रा डोला यात्रा मंगलवार महावीर विहार कॉलोनी टीकमगढ़ (म.प्र.) से जैन समाज टीकमगढ़ द्वारा पूर्ण श्रद्धा, भक्ति एवं धर्ममय वातावरण के साथ धूमधाम से निकाली गई। इसमें शहर के धर्मप्रेमी बंधु इस मोक्ष यात्रा में उपस्थित होकर पुण्यार्जन किया एवं पूज्य माताजी को समाजजनों ने अपनी भावभीनी विनयांजलि अर्पित की गई।

पूज्य संतों का मिला था मंगल सानिध्य

इस पावन साधना काल में आर्यिका स्वाध्याय श्री माताजी, क्षुल्लिका उपासनामति माताजी, क्षुल्लिका उदितमति माताजी एवं क्षुल्लिका मंत्राश्री माताजी सहित पूरे संघ की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही जैन समाज को संतों का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

कृतज्ञता एवं आभार

इस संपूर्ण धार्मिक प्रसंग को पूरी व्यवस्था के साथ संपन्न कराने में महावीर विहार के अध्यक्ष ज्ञानचंद (वर्धमान वाले), हेमंत कुमार जैन, राजकुमार जैन, अनुराग भैया, अनीता दीदी, अमन जैन सापोंन, आशीष जैन सहित सकल दिगंबर जैन समाज की विभिन्न कमेटियों, प्रबुद्ध जनों और युवाओं का पूर्ण सहयोग रहा।

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