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भारतीय संस्कृति में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्रधानता : आचार्य निर्भय सागर जी ने ज्ञान, धर्म की व्याख्या की


नगर में विराजित आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज के सानिध्य में भक्तजन पूजन के साथ-साथ प्रवचनों का भी लाभ उठा रहे हैं। प्रवचन सुनने के लिए नगर के सभी गुरु भक्त मंदिर पहुंच रहे हैं। मंगलवार को धर्मसभा हुई। ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर…


ललितपुर। नगर में विराजित आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज के सानिध्य में भक्तजन पूजन के साथ-साथ प्रवचनों का भी लाभ उठा रहे हैं। प्रवचन सुनने के लिए नगर के सभी गुरु भक्त मंदिर पहुंच रहे हैं। मंगलवार को धर्मसभा हुई। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अटा मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा दिन की शुरुआत प्रभु स्मरण करके करने से तन, मन और धन से स्वस्थ रहते हैं। परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और प्रेम वात्सल्य में वृद्धि होती है।

भारतीय संस्कृति के अनुसार पुरुष वही है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्रधानता को आत्मसात करे। आचार्यश्री ने कहा कि जिसके लिए श्रावक पुरुषार्थ करता है। भारतीय युवक बाप कमाई और स्त्री की कमाई से नहीं मेहनत की कमाई से जीवन यापन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज और परिवार को ऊपर उठाने के लिए हमेशा पुरस्कृत करना चाहिए। समाज में टांग पकड़ कर खींचने का नहीं हाथ पकड़ कर खींचने का काम करना चाहिए।

स्कूल से ज्ञान अस्पताल से स्वास्थ्य मिलता है
आचार्य श्री ने कहा स्कूल और अस्पताल से ज्ञान और स्वास्थ्य लाभ मिलता है, संस्कार नहीं, मंदिर से ज्ञान शिक्षा संस्कार स्वास्थ्य लाभ मिलता है और संस्कृति संस्कार और सभ्यता की रक्षा होती है। जहां जैन मंदिर होते हैं। वहां स्कूल, औषधालय, भोजनालय पुस्तकालय और व्यायाम शाला की आवश्यक होती है। इसलिए जैन मंदिर अवश्य बनाए जाते हैं। पुरुष को मानव इसलिए कहते हैं कि यह मनु की संतान हैं। इंसान इसलिए कहते हैं कि इसके अंदर दया, प्रेम, अहिंसा, परोपकार और करुणाभाव होता है क्योंकि, मानव ही अपनी आत्मा को पवित्र करता है और परमात्मा की साधना करता है।

आदमी भावना से बनता है भगवान
आचार्य श्री ने कहा आदमी कमाने से नहीं आगे बढ़ने से धनवान बनता है। आदमी खाने से नहीं पचाने से बलवान बनता है। आदमी भागने से नहीं सहयोग से महान बनता है। आदमी भागने से नहीं भावना से भगवान बनता है। जैन समाज दुनिया में सर्वाधिक सुखी संपन्न और महान इसलिए है क्योंकि, जैन समाज का आचार, विचार, आहार, व्यापार और व्यवहार शुद्ध है। वह अपने अहिंसक सिद्धांत पर चलकर और गुरुओं के आशीर्वाद से न्याय नीति पर चलते हैं। मंगलवार को सुबह प्रभु अभिषेक, शांति धारा करने का पुण्यार्जन कमलकुमार संजीवकुमार जैन ने किया। आचार्य श्री ससंघ का दिगंबर जैन अटा मंदिर में चातुर्मास स्थापित होने से नगर में धार्मिक माहौल है और श्रावक गण अचार्य संघ के सानिध्य में धार्मिक क्रियाएं कर रहे हैं।

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