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मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी के प्रवचनों में धैर्य, संयम का सार: पथरिया में चातुर्मास में धर्मसभा का पुण्यार्जन कर रहे भक्तजन 


आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। यहां पर उनके शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज जी के प्रातः नित्य प्रवचन हो रहे हैं। इस धर्मसभा में आसपास के शहर और कस्बों आदि से बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन पहुंचकर पुण्यार्जन कर रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


पथरिया। आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। यहां पर उनके शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर महाराज जी के प्रातः नित्य प्रवचन हो रहे हैं। इस धर्मसभा में आसपास के शहर और कस्बों आदि से बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन पहुंचकर पुण्यार्जन कर रहे हैं। मुनिश्री सर्वार्थसागर जी ने प्रवचन में कहा कि धैर्य, प्रेम, श्रम और विश्वास का फल मीठा होता है। आज हम एक अत्यंत महत्वपूर्ण सत्य पर विचार करें। धैर्य। धैर्य एक ऐसा गुण है, जो हमें जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रखता है। जब हम किसी कार्य को प्रेम, परिश्रम, और विश्वास के साथ करते हैं तो उसका फल अवश्य मिलता है। भले ही देर से मिले, लेकिन वह संपूर्ण होता है। जैसे आकाश में सूर्य कभी-कभी बादलों के पीछे छिप जाता है, तो क्या हम यह मान लेते हैं कि सूर्य अस्त हो गया? नहीं। हम जानते हैं, वह वहीं है। केवल कुछ समय के लिए हमारी दृष्टि से ओझल है।

ऐसे ही हमारे कर्मों का परिणाम भी कभी-कभी समय लेता है परंतु, यदि हमारा संकल्प पवित्र हो, हमारे प्रयास सच्चे हों, और हम धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करें तो वह दिन ज़रूर आता है जब सफलता हमारे सामने होती है। ध्यान रखिए धैर्य का अर्थ केवल प्रतीक्षा करना नहीं है,बल्कि आशा और विश्वास के साथ प्रतीक्षा करना है। इसलिए यदि आप आज कठिन समय से गुजर रहे हैं, तो निराश मत होइए। स्वयं पर विश्वास रखिए। अपने कर्मों पर विश्वास रखिए। आपका सूर्य, आपके जीवन में फिर से उदय होगा।

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