अष्टाहिन्का पर्व में श्री सिद्धों की आराधना के लिए श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का 8 दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर अनेक कार्यक्रम होंगे। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। जैन परम्परा में सिद्धचक्र महामण्डल विधान का बहुत महत्व है। आगमानुसार इस विधान में अनेकों पूजाएं एवं विधान सम्मिलित होते हैं। इसीलिए इसे विधानों का राजा कहा जाता है। इसमें किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि सिद्ध परमेष्ठी की आराधना की जाती है। यह वह अनुष्ठान है, जिससे हमारे जीवन के समस्त पाप, ताप व सन्ताप नष्ट हो जाते हैं। सभी ग्रहस्थ प्राणियों को जीवन में एक बार ज्ञात-अज्ञात पापों के क्षय के लिए सिद्धचक्र विधान अवश्य करना चाहिए। अत्यंत पुण्य से ही सिद्धों की आराधना का अवसर मिलता है। उक्त उदगार गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने मुरैना जैन मंदिर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। मुरैना में अष्टाहिन्का पर्व में श्री सिद्धों की आराधना के लिए श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का 8 दिवसीय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
होंगे कई कार्यक्रम
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मन्दिर कमेटी, मुरैना के अध्यक्ष महेशचंद बंगाली ने बताया कि होली से पूर्व अष्टाहिन्का पर्व में स्वस्तिधाम प्रणेत्री, गुरुमां गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के पावन सान्निध्य एवं निर्देशन में 27 फरवरी से 06 मार्च तक 08 दिवसीय 125 मंडलीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामण्डल विधान का आयोजन जैन बगीची मुरैना के जैन विद्यालय प्रांगण में आयोजित होने जा रहा है। परम पूज्य सराकोद्धारक षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित होने जा रहे सिद्धचक्र विधान में सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, मुनिश्री ज्ञातसागर जी महाराज, गणिनी आर्यिका श्री लक्ष्मीभूषण माताजी, गणिनी आर्यिका अंतसमति माताजी सहित अन्य साधु-साध्वियों का पावन सान्निध्य रहेगा। विधान की समस्त धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य पंडित संकेत जैन “विवेक” देवेंद्रनगर (पन्ना) सम्पन्न कराएंगे। मन्दिर कमेटी के मंत्री धर्मेंद्र जैन एडवोकेट के अनुसार इस आयोजन के लिए सकल जैन पंचायत में सर्वसम्मति से श्री पदमचंद जैन (चैटा वाले) को मुख्य संयोजक बनाया गया है। सौधर्म इंद्र-इंद्राणी बनने का सौभाग्य अनिल जैन-सुलोचना जैन (अंबाह बाले) को प्राप्त हुआ है। सोमवार 27 फरवरी को ध्वजारोहण, घटयात्रा, चित्र अनावरण के साथ विधान का शुभारम्भ होगा। तत्पश्चात निरन्तर श्री सिद्ध परिमेष्ठी की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित किए जायेंगे। विधान के अंतिम दिन 06 मार्च को विश्व शांति की कामना के लिए महायज्ञ का आयोजन होगा एवं श्री जिनेन्द्र प्रभु को रथ पर विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली जायेगी। अंतिम दिन सकल जैन समाज के सामूहिक भोज की व्यवस्था की गई है।

आयोजन समितियों का गठन
विधान के मुख्य संयोजक पदमचंद जैन (चैटा वाले) के अनुसार मुरैना नगर में सिद्धचक्र विधान तो बहुत हुए हैं लेकिन 125 मंडलीय विधान प्रथमवार होने जा रहा है। इस विधान की धार्मिक क्रियाओं में लगने वाली सम्पूर्ण द्रव्य सामग्री राजकुमार गौरवकुमार जैन (बीएसएनएल) ने प्रदान करने की घोषणा की है । विधान को भव्यता प्रदान करने बाबत एक आयोजन समिति का गठन किया गया है। जिसमें अलग अलग व्यक्तियों को विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारियां प्रदान की गई हैं।













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