Tag - सम्यक दर्शन

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मनुष्य जीवन में वैराग्य, व्रत संयम का पालन कर धर्म धारण करना चाहिए : रत्नत्रय, धर्म समागम, वैराग्य से संवेग भावना उत्पन्न होती हैं 

15 अगस्त को देश स्वतंत्र हुआ है। इससे यह संदेश और प्रेरणा मिलती है कि हमारी आत्मा भी अनेक भवों में कर्मों के अधीन होकर विश्व, संसार में घूम रही है। उसे भी...

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आत्मा का वास्तविक घर सिद्धालय सात राजू ऊपर स्थित है : विनयसंपन्नता भावना मोक्ष का द्वार है – आचार्य श्री की मंगल देशना

टोंक में सोलहकारण भावना पर्व के अंतर्गत आज दूसरी विनयसंपन्नता भावना का दिवस मनाया गया। आचार्य वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में विनय को मोक्ष का द्वार बताते हुए...

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देव शास्त्र गुरु शरण में भक्ति से पाप कर्मों की होती है निर्जरा : मुनि श्री पूज्य सागर जी ने कहा- गुरु भक्ति से होती है पुण्य की प्राप्ति 

अंतर्मुखी मुनिश्री 108 श्री पूज्य सागर जी महाराज ने आज अशरण भावना की विवेचना की। मुनिश्री पूज्यसागर जी ने बुधवार को दिगंबर जैन मंदिर परिवहन नगर में कहा कि देव...

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मुरैना में पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व धूमधाम से मनाया : महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाड़ू और संतों के प्रवचनों से गूंजे जैन मंदिर

मुरैना में मोक्ष सप्तमी के अवसर पर तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया। नगर के जिनालयों में महामस्तकाभिषेक...

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पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक आचार्य वर्धमान सागर जी के सानिध्य में श्रद्धा और भक्ति से मनाया : जिन पूजन करने वाला एक दिन पूज्यता को प्राप्त होता है 

टोंक में आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में पार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। धर्मसभा में महिलाओं को...

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मनुष्य जीवन साधनों के लिए नहीं साधना के लिए है : आचार्यश्री निर्भर सागरजी ने बताए जीवन को साधने के साधन

आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ससंघ महरौनी में विगत 8 दिनों से विराजित हैं, जो हर दिन अपने दिव्य प्रवचन के माध्यम से ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं। गुरुवार को...

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शिक्षण शिविर में मुक्ति के मार्ग का चिन्तन बताया: बच्चों को फल वितरण कर पुण्यार्जन किया

जैन मिलन स्वतंत्र डबरा की ओर से संयोजित शिक्षण शिविर जारी है। दूसरे दिन मुक्ति मार्ग के तत्वों पर चर्चा कर बच्चों को बोध दिया गया। शिविर के अंत में फल वितरण...

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आचार्य श्री विहर्ष सागर महाराज का चातुर्मासिक प्रवचन : माताएं अपने बच्चों को मालिक बनाने के लिए पैदा करें, नौकर नहीं 

महापुरुषों में भी क्रांति करने वाले बहुत कम ही हुए हैं। समाज का चिंतन करने वाले बिरले ही होते हैं। जब समाज में बुराइयां बढ़ती है, तो दूसरा गुट समाज उसका फायदा...

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राष्ट्रसंत विहर्ष सागर महाराज के चातुर्मासिक प्रवचन : विपरीत परिस्थितियों में भी जिसकी श्रद्धा स्थिर रहे वह सच्ची सम्यक दृष्टि है

मोदी जी की नसियां में चातुर्मास कर रहे राष्ट्रसंत विहर्ष सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए सम्यक दर्शन (देव ,शास्त्र ,गुरु के प्रति श्रद्धा) का महत्व बताया।...

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