Tag - मंगल कलश स्थापना

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चातुर्मासिक प्रवचन में बह रही ज्ञान की गंगा : कंठ में विद्या और गांठ में पैसा समय पर काम आता है -विज्ञानमति माताजी

उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए...

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धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : जैनी सदा पापियों के लिए अपशुकन है – मुनि श्री सुधासागर महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि कर्म की अदालत में कोई लेन-देन नहीं करना। हर्ष पूर्वक सजा को ग्रहण करना...

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आचार्य विशुद्धसागर गुरुदेव ने धर्मसभा में कहा : धर्म, समाज, संस्कृति, परिवार की उन्नति के लिए पुरुषार्थ करें

दिगम्बराचार्य विशुद्धसागर गुरुदेव ने शनिवार को धर्मसभा में प्रवचन देते हुए हुए कहा कि कार्य करने का अधिकारी वही होता है जो लगनशील, धैर्यवान, शक्तिशाली तथा...

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चातुर्मासिक प्रवचन में धर्मसभा को किया संबोधित :  महान बनना तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना – मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। पढ़िए शुभम जैन की...

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चातुर्मासिक प्रवचन में धर्मसभा : अहिंसा धर्म ही सर्व श्रेष्ठ है – आचार्य विशुद्धसागर महाराज

दिगम्बराचार्य पूज्य श्री विशुद्धसागर जी गुरुदेव ने धर्म सभा में सम्बोधन करते हुए कहा कि अहिंसा-धर्म ही सर्व-श्रेष्ठ है, जीव रक्षा से बढ़कर अन्य कोई धर्म नहीं...

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चातुर्मासिक प्रवचन में बह रही ज्ञान की गंगा : धर्म निष्ठ, विनयवान और सदगृहस्थ बनकर ढोंग का नहीं, ढंग का जीवन जियो -विज्ञानमति माताजी

उदयनगर में चातुर्मासिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहीं वंदनीय आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए...

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धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : माता-पिता के प्रतिकूल न चलें- मुनि श्री सुधासागर महाराज

निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि महान बनना है तो एक बार दुश्मन से प्रशंसा सुनकर मरना। जानते हैं उनके...

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धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : सोचो नहीं, सोच बदलो तो बदलेगा जीवन – आचार्य विनिश्चयसागर

जो आज तक किया है अब नहीं करेंगे और जो नहीं किया है वो अब करेंगे। ऐसी विचारधारा जब आपकी अंतस चेतना में आयेगी, तब आप कुछ सुखी हो सकते हैं। उक्त उद्बोधन आचार्य...

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चातुर्मास के दौरान धर्मसभा में प्रवचन : मनुष्य पर्याय चिंतामणि रत्न के समान हैं -आचार्य विनिश्चयसागर

मनुष्य पर्याय से बढ़कर कोई सौभाग्य नहीं हैं, ये सबसे बड़ा सौभाग्य हैं जो आपको प्राप्त हुआ है। आप इसे महसूस करें तभी आप मानव पर्याय की महत्त्वता समझ सकेंगे।...

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चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन हो रही है धर्मसभा : आत्मा बीज रूप है जो स्वयं ही पुरुषार्थ करके परमात्मा बन जाती है – आर्यिका विभाश्री माताजी

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ससंघ ने वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान बीते 6 जुलाई को शिक्षण शिविर में अपनी वाणी से सभी...

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