Tag - धर्मसभा

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कुंदकुंद ज्ञानपीठ इंदौर: निःशुल्क प्राकृत भाषा पाठ्यक्रम अध्ययन कार्यशाला

जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा प्राकृत भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क...

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संस्कृति और संस्कार प्रथम: स्याद्वाद युवा क्लब ने त्रिलोकतीर्थ में किया 500वां अभिषेक 

हमें कभी भी अपनी संस्कृति और संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए । पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज ने स्याद्वाद के माध्यम से जिन संस्कारों...

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सच्चा सुख, शांति अपने अंदर ही है: आचार्य प्रमुख सागर 

स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्म स्थल में विराजित आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ससंघ द्वारा सांयकालीन प्रवचन मे श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा की...

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समय चक्र है घूमता, करता सबका न्याय, कोई इससे बच सके ऐसा नहीं उपाय: आर्यिका विभाश्री माताजी 

आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा-जीवन में तीन का विशेष महत्व होता है । पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट श्रीफल जैन न्यूज़ के...

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जैन समाज द्वारा अच्छी पहल: अपने लोगों की मदद के लिए की जैन बैंक की स्थापना

जैन समाज के युवाओं द्वारा एक अच्छी पहल शुरू हुयी । युवाओं को सोचना हैं की आर्थिक आभाव में किसी सजातीय परिवार के सपने अधूरे न रहें, और किसी गैर समाज के आगे हाथ...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : बाल संस्कार पाठशाला का हुआ आयोजन

धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि हमें भगवान की पूजन अष्ठ द्रव्य से करनी चाहिए और हमें मंदिर में तीन बार परिक्रमा देते समय देव स्तुति बोलनी...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : हमारा भारत कर्म प्रधान देश है – अचार्य प्रमुख सागर महाराज

 कर्म गहन विधान पूजन हमारे जीवन को महान बनाता है। हमारे जीवन में 148 कर्म की प्रकृतियां हैं, वही हमारे शरीर का निर्माण करती हैं, वही हमें सुख- दुख और चारों...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन उपासना: समर्पण एवं भावना से आराधना की उत्पत्ति होती है – आर्यिका विभाश्री 

वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने कहा कि जो अपने परिवार के साथ भगवान की पूजा करते हैं, वे तीर्थंकर के कुलों में उत्पन्न होते हैं...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : शोधन करके ध्यानपूर्वक भोजन करो- आर्यिका विज्ञानमति माताजी

आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने प्रवचन के दौरान कहा कि जब तक जीव के अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ समाप्त नहीं होती तब तक सम्यगदर्शन रूपी सूर्य का उदय नहीं...

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प्रवचन के माध्यम से बताया आहारदान का महत्व : बरसात, हवा, कर्म और साधु कब आ जाए, पता नहीं – मुनिश्री सुधासागर

जब आप मकान बनवाते हैं तो उसमें विभिन्न विषयक अलग-अलग कमरे बनवाते हैं लेकिन आप साधुओं के लिए आहारशाला या स्वाध्याय के लिए अलग से कमरा नहीं बनवाते। दिगम्बर साधु...

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