जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा प्राकृत भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क...
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हमें कभी भी अपनी संस्कृति और संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए । पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज ने स्याद्वाद के माध्यम से जिन संस्कारों...
स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्म स्थल में विराजित आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ससंघ द्वारा सांयकालीन प्रवचन मे श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा की...
आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा-जीवन में तीन का विशेष महत्व होता है । पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट श्रीफल जैन न्यूज़ के...
जैन समाज के युवाओं द्वारा एक अच्छी पहल शुरू हुयी । युवाओं को सोचना हैं की आर्थिक आभाव में किसी सजातीय परिवार के सपने अधूरे न रहें, और किसी गैर समाज के आगे हाथ...
धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि हमें भगवान की पूजन अष्ठ द्रव्य से करनी चाहिए और हमें मंदिर में तीन बार परिक्रमा देते समय देव स्तुति बोलनी...
कर्म गहन विधान पूजन हमारे जीवन को महान बनाता है। हमारे जीवन में 148 कर्म की प्रकृतियां हैं, वही हमारे शरीर का निर्माण करती हैं, वही हमें सुख- दुख और चारों...
वासुपूज्य जिनालय के प्रांगण में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने कहा कि जो अपने परिवार के साथ भगवान की पूजा करते हैं, वे तीर्थंकर के कुलों में उत्पन्न होते हैं...
आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने प्रवचन के दौरान कहा कि जब तक जीव के अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ समाप्त नहीं होती तब तक सम्यगदर्शन रूपी सूर्य का उदय नहीं...
जब आप मकान बनवाते हैं तो उसमें विभिन्न विषयक अलग-अलग कमरे बनवाते हैं लेकिन आप साधुओं के लिए आहारशाला या स्वाध्याय के लिए अलग से कमरा नहीं बनवाते। दिगम्बर साधु...








