Tag - धर्मसभा

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धर्म नगरी मुरैना में दसलक्षण महापर्व के अवसर पर तत्वार्थ सूत्र का वाचन : मुनि श्री विलोक सागर जी के सानिध्य में नीरज शास्त्री कर रहे हैं तत्वार्थ सूत्र के मंत्रों का पाठ

मुरैना के पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के अंतर्गत तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का विशेष वाचन चल रहा है। विद्वान नीरज जैन शास्त्री सूत्रों का पाठ कर रहे...

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शौच धर्म पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का प्रेरक प्रवचन: लोभ त्याग ही सच्चा शौच धर्म है 

विरागोदय तीर्थ पथरिया में पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का मंगल चातुर्मास जारी है। धर्मसभा में उन्होंने कहा कि शौच धर्म का अर्थ केवल बाहरी...

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मन, वाणी और व्यवहार की एकरूपता ही सरलता लाती है- मुनि श्री प्रमाण सागर : उत्तम आर्जव धर्म पर धर्मसभा में बताए मुनिश्री ने सरलता के उपाय

जैसा तुम बाहर से दिखना चाहते हो वैसा अंदर से भी बन जाओ। चलो सीधा और बनो सच्चा। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव...

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शिरोमणि आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज का 75वां अवतरण दिवस बड़े धूमधाम से मनाया : पर्यूषण पर्व पर धामनोद में आयोजित हुआ भावपूर्ण समारोह

धामनोद में पर्यूषण पर्व के अवसर पर शिरोमणि आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज का 75वां अवतरण दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। समाज के गणमान्य...

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जीवन में पाप कार्यों से बचना ही आर्जव धर्म : आचार्य निर्भय सागर : पर्यूषण पर्व पर जैन मंदिरों में पूजन-अभिषेक कर श्रद्धालुओं ने जताई आस्था

ललितपुर में पर्यूषण पर्व पर आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि जीवन में पाप कार्यों से बचना और मायाचारी का त्याग करना ही सच्चा आर्जव...

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आध्यात्मिक साधना का अद्वितीय जीवनवृत्त : संयम, तप और वात्सल्य के प्रतीक हैं आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जीवन संयम, तप, करुणा और धर्मप्रभावना का अद्वितीय उदाहरण है। 75वें जन्मदिवस पर उनका यह जीवनवृत्त समाज के लिए प्रेरणा...

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अहंकार जीव को पतन की ओर ले जाता है – बड़े जैन मंदिर में प्रवचन : विनम्रता से ही आत्मा का उद्धार संभव है – मुनिश्री विबोधसागर

मुरैना के बड़े जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन मुनिश्री विबोधसागर जी ने उत्तम मार्दव धर्म का महत्व समझाते हुए कहा कि अहंकार आत्मा के पतन का कारण है और...

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जैन मंदिरों में आरंभ हुई अपूर्व प्रभावना, श्रावक-श्राविकाओं ने किया सामूहिक पूजन : पर्यूषण महापर्व का शुभारम्भ – आचार्य निर्भयसागर के सानिध्य में नगर में धर्मध्यान आराधना

ललितपुर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में पर्यूषण महापर्व का शुभारम्भ हुआ। नगर के जैन मंदिरों में श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक पूजन, ध्यान...

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क्षमा से ब्रह्मचर्य तक: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के प्रवचनों में जीवन की राह

– निष्कर्ष दशलक्षण महापर्व केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का अवसर है। क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, दान और ब्रह्मचर्य- ये सभी...

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जैन शिलालेखों में आमेर का नाम बताया है अमरावती भी : जैन मंदिरों के कारण कभी जैन नगरी कहलाता था आमेर

जयपुर बसने के पहले पुरानी राजधानी आमेर को जैन नगरी भी था। यहां पर बने अति प्राचीन जैन मंदिर इस बात के गवाह रहे है कि इनमें कठोर साधना और तपस्या करने वाले जैन...

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