Tag - जैन मुनि

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जैन समाज राजनीति में आगे बढ़े : जैन राजनीतिक चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किया आह्वान

जैन समाज हमेशा से राष्ट्र हित में काम करता रहा है। प्रथम लोकसभा में जैन समाज से 35 से 40 सांसद जैन समाज थे। संविधान सभा में भी जैन समाज कें 5 जन सम्मलित थे।...

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ईर्ष्या मनुष्य के चरित्र में लाभ की जगह हानि का बीज बोती है : आर्यिका विभाश्री ने ईर्ष्या भाव के बारे में बताया 

व्यक्ति को जीवन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता, वह कभी भी गुणों को ग्रहण नहीं करता। दूसरों का सुख वह देख नहीं सकता है...

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भव्यछपक आसन्न सागर की हुई समाधि : पूरे मुनिसंघ ने उनकी सल्लेखना समाधि में धर्म आराधना कराई।

आर्यिका दृढमतिमाताजी, ब्र. सविता दीदी और ब्र. अनीता दीदी के गृहस्थ जीवन के पिता 94 वर्षीय गुलाबचंद जैन पटना वालों की भाग्योदय तीर्थ के संत भवन में 26 दिन की...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में प्रवचन : सभी पुस्तकों, अध्यात्म एवं पठन-पाठन का मुख्य उद्देश्य हमारी आत्मा का उत्थान है – मुक्ति दर्शना माताजी 

 पार्श्व प्रधान पाठशाला में विराजित साध्वी श्री मुक्ति दर्शना माताजी ने अपने प्रवचन में धर्म ग्रंथ में धर्म की परिभाषा का विस्तृत विवेचन करते हुए बताया कि...

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चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष पर आयोजन : विद्वत् संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह 13 अगस्त को 

परम पूज्य आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज की प्रेरणा से स्थानीय विद्वत संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम आगामी 13 अगस्त को श्री दिगंबर जैन मंदिर तिलकगंज...

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आचार्य श्री विहर्ष सागरजी महाराज के सानिध्य में कार्यक्रम : केंद्रीय महिला परिषद की वार्षिक पत्रिका कृतित्व कलश का विमोचन

अखिल भारतीय केंद्रीय महिला परिषद की वार्षिक पत्रिका कृतित्व कलश का विमोचन बड़ा गणपति स्थित मोदीजी की नसियां में आचार्य श्री विहर्षसागर जी महाराज के सानिध्य में...

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भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 के बढ़ते कदम : बरायठा एवं दलपतपुर में नवीन शाखाओं का गठन

भारतीय जैन मिलन के भ्रमण कार्यक्रम के दौरान बरायठा एवं दलपतपुर में नवीन शाखाओं का गठन राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पदाधिकारियों की उपस्थिति में किया गया। पढ़िए मनीष...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन : गुरु ने की भक्तामर 30वें काव्य की व्याख्या

धर्मसभा में विहसंतसागर जी महाराज ने कहा कि वाणी हमेशा मधुर होनी चाहिए। वाणी में कभी भी कर्कश नहीं होना चाहिए। जैसे बांस की बांसुरी बनाई जाती है तो उसकी आवाज...

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चातुर्मासिक धर्मसभा में दिए प्रवचन साधु, राजा और पूजा को निकला श्रावक होता है मांगलिक: मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पुरुष तीन अवस्थाओं में मांगलिक होता है, एक साधु, दूसरा राजा और तीसरा जब कोई...

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कर्म का फल तो सब को भोगना ही पड़ता है, जैसा जो करेगा वैसा फल उसे मिलेगा : आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने राग द्वेष के बारे में बताया 

राग दो प्रकार का होता है, प्रशस्त राग और अप्रशस्त राग। देव शास्त्र गुरु के प्रति जो राग है। हमारा ये संसार में भ्रमण कराने वाला नहीं है ये संसार से तिराने वाला...

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