Tag - आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज

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मुनि श्री पूज्य सागर जी के प्रथम शिक्षा गुरु और व्रत प्रदाता हैं आचार्य श्री : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को प्रतिष्ठित काष्ठ जिनवाणी समर्पित         

मुनि श्री पूज्य सागर जी के प्रथम शिक्षा गुरु और व्रत प्रदाता आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को जिनवाणी माता श्री नमीष जैन, अध्यक्ष पोरवाड़ समाज, इंदौर ने आचार्य...

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महापुरुषों की न्याय और नीति संस्कृति से परमात्मा बनने का पुरुषार्थ करें: टोंक में 9 दिवसीय अखंड णमोकार मंत्र का पाठ प्रारंभ 

 अतिशय क्षेत्र टोंक में प्रतिदिन अनेक प्रसिद्ध समाजसेवी श्री जी और आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पधार रहे हैं। आचार्य श्री वर्धमान...

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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का चल रहा है चातुर्मास : टोंक जैन नसिया में बनेगा “आचार्य शांति सागर ध्यान केंद्र”

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के चातुर्मास के दौरान नगर में धर्म की वर्षा निरंतर हो रही है। समाजजन इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाते हुए प्रतिदिन विविध धार्मिक...

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मुनि श्री हितेंद्र सागर ने दिया मार्गदर्शन : दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर “सुसंस्कारों का शंखनाद” का आयोजन

राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की प्रेरणा से 13 से 23 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं के लिए “सुसंस्कारों का शंखनाद” शीर्षक से दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का...

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आत्महत्या का सोचना और करना पाप है इससे अल्पायु कर्म का बंध होता है: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म आराधना का महत्व समझाया 

दशलक्षण पर्व में 10 दिनों तक धर्म की आराधना धर्म की पाठशाला अध्यात्म महापर्व में आपने क्या सीखा है? उत्तम क्षमा, मार्दव आर्जव, शौचधर्म से क्रोध, मान, माया और...

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त्याग धर्म में राजा श्रेयांस ने सबसे पहले दानतीर्थ का प्रवर्तन किया : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने त्याग और दान को श्रेष्ठतम निरुपित किया 

दसलक्षण धर्म में पहले दिन से चार कषायों का त्याग करने की शिक्षाऔर उपदेश दिए गए। शास्त्रों और पूजन में उल्लेख है कि दान चार प्रकार का है और चार संघ को दीजिए। यह...

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संसार परिभ्रमण समाप्त करने के लिए बहिरंग और अंतरंग तप आवश्यक: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने करवाई इंद्र ध्वज महामंडल विधान की पूजा

आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि दशलक्षण पर्व में अनेक पर्व समाहित हैं। प्रतिदिन आप दशलक्षण धर्म और इंद्र ध्वज महामंडल विधान की पूजन कर रहे हैं। सात राजू...

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मन वचन और काय की पवित्रता से शुचिता आती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया सत्य धर्म का रहस्य 

विधानाचार्य कीर्तिय के निर्देशन में पंचामृत अभिषेक के बाद इंद्र ध्वज मंडल विधान की पूजन प्रतिदिन चल रही है। आचार्य श्री द्वारा पूजन के मध्य पूजन के द्रव्यों को...

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मन, वचन,काय कुटिलता का परित्याग सरलता धारण ही उत्तम आर्जव धर्म: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76 वां अवतरण वर्ष भक्ति पूर्वक मनाया

दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने अपनी देशना में कह कि भगवान की इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजन सामान्य बात नहीं है। बहुत...

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आचार्य श्री का 76वां अवतरण दिवस दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर भक्ति पूर्वक मनाया : मन, वचन, काय की कुटिलता का परित्याग कर सरल निष्कपट भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म – आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76वां अवतरण दिवस दशलक्षण पर्व के तृतीय उत्तम आर्जव दिवस पर भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रवचनों, पूजन, महाआरती...

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