Tag - Shriphal Jain News

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दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन मनाया अनंत चतुर्दशी का पर्व : भगवान वासुपूज्य का निर्वाण कल्याणक पर निर्वाण लाडु चढ़ाया

गुदड़ी मंसूर खां स्थित श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन शनिवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की भक्तिमय विशेष पूजा-अर्चना की। अनंत...

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युवाओं में शील संयम और सदाचार के प्रति भटकाव : मुनि श्री प्रमाण सागर ने ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या कर संयम की शिक्षा दी

अकेले यौन संयम को साध लेना ही ब्रह्मचर्य नहीं,अपनी आत्मा के निकट आकर अपनी साधना को पूर्ण करने का नाम ब्रह्मचर्य है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने...

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मन की इच्छाओं को रोकना ही सबसे बड़ा तप है : मुनिश्री जयंत सागर जी महाराज ने नांद्रे में धर्मसभा में त्याग की महिमा बताई

पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री...

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त्याग जीवन का सुख और राग दुख का कारण: आचार्य श्री निर्भय सागरजी ने उत्तम त्याग धर्म को जीवन का मूल बताया 

त्याग के माध्यम से जीवन की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। जैसे-जैसे वस्तु का त्याग करते जाते हैं। वैसे-वैसे जीवन की उन्नति होती चली जाती है। त्याग में सुख...

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ऊंची सोच से ही मनुष्य की उन्नति संभव है : मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने चार प्रकार के दान करने की प्रेरणा दी 

निःस्वार्थ भाव से दिया गया दान सच्चा और प्रभावी होता है। जिससे दानदाता को व्यक्तिगत संतुष्टि मिलती है। उदारता और करुणा का विकास होता है तथा अहंकार का विनाश...

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जब डॉक्टर की पर्ची के हर अक्षर स्पष्ट होंगे: तब ही मरीज का जीवन और अधिकार सुरक्षित रहेंगे

स्वास्थ्य लाभ के लिए जब भी डॉक्टर के पास जाते हैं तो उनके प्रिस्क्रिप्शन में लिखी दवाओं के नाम स्पष्ट नहीं होते। मेडिकल स्टोर्स पर भी कई बार अंदाज से ही दवा दे...

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उत्तम पात्र को दिया हुआ आहार दान श्रेष्ठ है: प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन ने उत्तम त्याग धर्म को विश्लेषित किया 

गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। उन्हीं के संघस्थ ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन जी ने उत्तम त्याग धर्म के बारे में...

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मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी ने कहा त्याग केवल भौतिक चीज़ों का नहीं है: पथरिया की धर्मसभा में जीवन उत्तम आत्म कल्याण की मिल रही प्रेरणा 

मुनिराजों सहित आचार्यश्री की धर्मसभा का धर्मानुरागी समाजजन भरपूर पुर्ण्याजन कर रहे हैं। यहां नित प्रवचनों की श्रृंखला में मुनिराज जीवन को उत्तम बनाने और आत्म...

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त्याग धर्म में राजा श्रेयांस ने सबसे पहले दानतीर्थ का प्रवर्तन किया : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने त्याग और दान को श्रेष्ठतम निरुपित किया 

दसलक्षण धर्म में पहले दिन से चार कषायों का त्याग करने की शिक्षाऔर उपदेश दिए गए। शास्त्रों और पूजन में उल्लेख है कि दान चार प्रकार का है और चार संघ को दीजिए। यह...

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तपस्वियों को दशलक्षण पर्व में उपवास तपस्या पर दी शुभकामनाएं : आर्यिका विज्ञानमति माताजी से लिया आशीष 

फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज की ओर से पूरे देश में पर्यूषण पर्व दशलक्षण पर्व पर किए जा रहे 5, 10, 16 एवं 32 उपवासों के लिए साता पूछकर बधाई एवं शुभकामनाएं दी गई...

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