Tag - Shreefal Jain News

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मुनिश्री विकसंत सागरजी और आर्यिका विविक्त श्री माताजी का नगर प्रवेश : श्रावक-श्राविकाओं ने मुनिराज के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बनाया

गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य दिगंबर जैन उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज ससंघ और शिष्या आर्यिका विविक्त श्री माताजी ससंघ का गुरुवार को मऊ...

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जो सब कुछ त्याग देते हैं, वहीं परम शांति पाते हैं : आचार्य विशुद्ध सागर जी ने उत्तम त्याग धर्म पर दी मंगल देशना 

आचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ में चल रहा है। वैभव बडामलहारा जी ने बताया कि विरागोदय तीर्थ में आचार्य विशुद्ध सागर जी ने...

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तप में निराकुलता है इससे ही आनंद है : पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा वही तप जिन शासन में श्लाघनीय है, जो आत्मा कल्याण करे 

पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहा है। यहां पर पर्युषण पर्व के दौरान दसलक्षण महोत्सव के तहत मुनिराजों के...

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कविता काष्ठरथ: प्रतीके सौहार्द्र: शांति-सद्भाव के लिए रथोत्सव पर भावपूर्ण कविता

पर्युषण पर्व के समापन पर प्रतिवर्ष निकाले जाने वाले रथोत्सव पर भावपूर्ण और अहिंसा, शांति, विश्व बंधुत्व, भातृत्व भाव, संयम, त्याग, तप, तपस्या आदि धर्म का पालन...

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जो दिख रहा है वह सत्य नहीं, जो देख रहा है वह सत्य है: मुनि श्री प्रमाणसागर ने कहा- जीवन की असली सच्चाई यह है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित 

मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने प्रवचन में जीवन के परम सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य पूरी उम्र असत्य के मोहजाल में उलझा रहता है और सत्य की अनुभूति से...

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अतिशय क्षेत्र कैथुली में उत्तम शौच धर्म मनाया : भगवान पुष्पदंतनाथजी के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडु चढ़ाया

अतिशय क्षेत्र कैथुली में दसलक्षण पर्व के चौथा दिवस उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया गया। भगवान पुष्पदंत नाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया गया। निर्वाण लाडू...

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मनुष्य में देवत्व की प्रतिष्ठा की क्षमा भावना: जैन और वैदिक दर्शन दोनों में ही क्षमा को श्रेष्ठ बताया 

भारत की गौरवशाली वांग्मय परंपरा के प्रमुख दर्शन जैन दर्शन और वैदिक दर्शन, दोनों की भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के प्रमुख आधार स्तंभ हैं। जो क्षमा को आत्म उन्नति...

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अपने भीतर की शांति को मज़बूत करना होगा: मुनिश्री ने शांति के स्रोत को मजबूत करने का मार्ग दिखाया 

नगर में मुनिराजों के वर्षायोग चातुर्मास के चलते धर्मसभा में मंगल वचनों की अपूर्व वर्षा हो रही है। मुनियों के प्रवचन से यहां की धर्मप्रेमी जनता का धर्म आराधना...

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वैराग्य की शुरुआत स्वयं से होती है : मुनि श्री विव्रत सागर जी का आत्म-पहचान के महत्व पर जोर

स्थानीय जैन धर्मशाला में 48 वें दिन मुनि श्री विव्रत सागर जी मुनिराज ने प्रवचन करते हुए आत्म-पहचान के महत्व पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं को शरीर या...

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दिगंबरत्व वासना का नहीं उपासना का प्रतीक: आचार्य निर्भय सागर जी ने स्पष्ट किया दिगंबरत्व का सार

आचार्यश्री निर्भयसागर जी ललितपुर में अपने प्रवचनों से धर्म देशना दे रहे हैं। उन्होंने बुधवार को दिगंबरत्व को सिलसिलेवार समझाया। उन्होंने कहा कि हमारा देश...

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