आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल सान्निध्य में सहस्त्रनाम विधान का आरंभ हुआ, जिसमें भगवान के 1008 दिव्य गुणों का गुणानुवाद एवं अध्र्य समर्पण श्रद्धा के साथ...
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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संत समागम के दौरान धर्म को रागी से बैरागी बनने का मार्ग बताया। प्रथमाचार्य शांतिसागर जी महाराज के अविस्मरणीय योगदानों का...








