Tag - Religious Assembly

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स्व विवेक से किया कार्य ही सार्थक परिणाम देता है : मुनिश्री विहसंत सागर ने स्वविवेक के प्रयोग का बहुमूल्य अर्थ बताया 

विवेकपूर्ण व्यक्ति संसार में यश प्राप्त करते हैं और अविवेकी व्यक्ति उपहास के पात्र बनते हैं। किसी भी कार्य को करने से पूर्व व्यक्ति को अपने विवेक का इस्तेमाल...

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धर्म बुढ़ापे में नहीं यौवनावस्था में अपनाएं : मुनिश्री विहसंत सागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में दिया दिव्य प्रबोधन 

आचार्यों ने कहा है कि धर्म तो प्रारंभ से ही करना चाहिए। बुढ़ापे में जब आपके अंग शिथिल हो जाएंगे तो धर्म की उपासना कैसे होगी। यह उद्गार आचार्यश्री विराग सागरजी...

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जो छोड़ते हैं वे निडर होकर घूमते हैं : मुनि श्री विध्रुव सागर जी ने कहा-हम सभी में भगवान बनने की सामर्थ्य है

एक दिगम्बर जैन साधु सबकुछ छोड़कर निर्भय होकर विचरण करते हैं। पूर्वाचार्यों ने कहा है कि जोड़ने की अभिलाषा ही दुःख का कारण है। यह विचार मुनि श्री विध्रुव सागर...

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धर्म के संस्कार और बीज दादा दादी ही करते हैं रोपित : मुनि श्री प्रणुत सागर जी ने संस्कारों के लिए परिवार के बुजुर्गों को बताया आधार 

बड़वानी नगर में विराजित आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने मंगलवार को बड़वानी दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित किया।...

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हम अपनी गलतियां नहीं देखते दूसरों की गलतियां दिख जाती है : विश्व शांति महायज्ञ गजरथ महोत्सव का ध्वजारोहण के साथ होगा शुभारंभ

दूसरों की छोटी-छोटी गलतियां दिख जाती हैं। हम अपनी ग़लतीया नहीं देखते। अपने जीवन को अच्छा बनाने के लिए सबसे पहले हमें अपनी गलती को देखने की कला सिखाना होगी। यह...

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हम स्वस्तिक को जिन भावों से बनाते हैं उसी अनुरूप मिलता है फल: 700 श्रद्धालुओं ने स्वस्तिक रचना कर साधना में लिया हिस्सा 

परमात्मा की भक्ति से हर संकट टल जाते हैं। स्वस्तिक बनाने से माता लक्ष्मी का आगमन होता है। यह उद्बोधन उपप्रवर्तक श्रुतमुनि महाराज ने महावीर भवन इमली बाजार में...

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ज्ञान ही आनंद है, ज्ञान से ही शांति मिलती है: आचार्य विशुद्ध सागर जी ने पथरिया में ज्ञान की महिमा व्याख्यायित की 

आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने यहां धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रेष्ठ विद्वान वही है, जो नैतिक जीवन जिये, जो अशांति के कारणों से...

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अंतरंग के भावों के अनुरूप ही कर्मफल की होती है प्राप्ति: मुनिश्री विलोकसागर जी के सानिध्य में प्रतियोगियों का बहुमान

यदि हमारे हृदय में करुणा का भाव नहीं हैं तो आपकी पूजा भक्ति कभी भी सफल नहीं हो सकती। यह उद्गार नगर में चातुर्मासरत जैन संत मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े...

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मन की इच्छाओं को रोकना ही सबसे बड़ा तप है : मुनिश्री जयंत सागर जी महाराज ने नांद्रे में धर्मसभा में त्याग की महिमा बताई

पट्टाचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री...

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श्रावकों को संयम का मार्ग दिखाता है पर्यूषण पर्व : संयम की साधना में पंचेंद्रियों पर अंकुश आवश्यक -मुनिश्री विलोकसागर’

जैन दर्शन में प्राणी मात्र के कल्याण पर जोर दिया गया है। संसार के प्रत्येक प्राणी के अंदर अपार क्षमता है लेकिन, कषायों के वशीभूत होकर वह सब कुछ भूल चुका है।...

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