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आचार्य विनम्र सागर जी के प्रवचनों का सार संसार में असार है: आचार्यश्री के प्रवचन में बड़ी संख्या में समाजजन रहे मौजूद 

दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में गुरुवार को ‘जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाऐ रे’ के रचयिता उच्चारणाचार्य विनम्र सागर जी महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन...

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आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का केश लोच : केशलोच दिगंबर साधु का मूल गुण

आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी, मुनि श्री प्रभव सागर जी, मुनि श्री प्रबुद्ध सागर, आर्यिका श्री निर्माेहमति एवं क्षुल्लक श्री विशाल सागर ने केश लोच किए। केश लोचन के...

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कुण्डलपुर में आचार्यश्री समय सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गयाः आचार्य छत्तीसी विधान, भजन संध्या का हुआ आयोजन

सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में प.पू.आचार्य श्री विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया। एक वर्ष...

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त्याग और तप की प्रतिमूर्ति जैन सन्तः जैन साध्वी ज्ञानमती माताजी ने किया केशलोच

जैन साध्वी गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने भव्य केशलोच किया। जैन ग्रंथ के अनुसार दिगम्बर साधु-साध्वियों को साल में 3 बार यह प्रक्रिया प्रत्येक 4 माह में...

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जन्म, मरण संयम, तप, साधना पूर्वक समाधि मरण से सार्थक होता हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः त्याग की प्रेरणा लेना चाहिए

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अनेक जिनालयों मुनियों की जन्मस्थली धर्म नगरी धरियावद में 52 साधु सहित विराजित हैं। प्रतिदिन दोपहर को आचार्यश्री सानिध्य में...

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गुरु के सानिध्य, विनयपूर्वक अर्जित ज्ञान से शिष्य का जीवन का निर्माण होता हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः शिव सागरजी का वात्सल्य कभी भूल नहीं सकते 

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी मुनिश्री पुण्य सागर एवं साधुओं सहित धरियावद विराजित हैं। आपके संघ सानिध्य में आचार्यश्री शिव सागरजी का 57वां अंतरविलय समाधि वर्ष...

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संयम दीक्षा धारण करने से सच्चा सुख मिलता है-मुनि हितेंद्र सागरजीः आचार्य वर्धमान सागरजी धर्म प्रभावना कर रहे हैं।

साधुओं की जन्म एवं कर्म भूमि धर्मनगरी मुंगाणा में आचार्य वर्धमान सागरजी ससंघ विराजित है। श्रावक-श्राविकाओं के संस्कार शिविर का आयोजन चल रहा है। जिसमें हितेंद्र...

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स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः श्री महायशमति ने श्रावक का अर्थ प्रतिपादित किया

प्रमादमय स्त्रियों को प्रमादमय मूर्तियों की उपमा दी गई है, अर्थात स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है, जिस प्रकार मिट्टी की मूर्ति में मिट्टी की बहुलता...

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