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क्षमावाणी पर्व पर जिनवाणी माता से क्षमा मांगने का आह्वान : जिनालयों में देव, शास्त्र और गुरु की आराधना से होता है पाप कर्मों का क्षय – आचार्य वर्धमान सागर

टोंक में आयोजित धर्मसभा में आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने उपदेश दिया कि देव, शास्त्र और गुरु की आराधना से पुण्य अर्जित होता है और पाप कर्मों का क्षय होता...

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संत समागम में आचार्य वर्धमान सागर जी ने कहा – रागी को बैरागी बनाने का सूत्र धर्म है : प्रथमाचार्य शांतिसागर जी के योगदान को याद कर दी आचार्य भक्ति की प्रेरणा

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संत समागम के दौरान धर्म को रागी से बैरागी बनने का मार्ग बताया। प्रथमाचार्य शांतिसागर जी महाराज के अविस्मरणीय योगदानों का...

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आत्मा का वास्तविक घर सिद्धालय सात राजू ऊपर स्थित है : विनयसंपन्नता भावना मोक्ष का द्वार है – आचार्य श्री की मंगल देशना

टोंक में सोलहकारण भावना पर्व के अंतर्गत आज दूसरी विनयसंपन्नता भावना का दिवस मनाया गया। आचार्य वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में विनय को मोक्ष का द्वार बताते हुए...

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जिनवाणी में श्रद्धा-भक्ति का जल देने से मिलता है धर्म रूपी फल: आचार्य वर्धमानसागर जी

धर्म नगरी टोंक में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में जिनवाणी रूपी वृक्ष में श्रद्धा और भक्ति का जल देने से...

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श्रुत हमारा धर्म है, धर्म हमारा जीवन है : जिनवाणी माता का संदेश – पढ़ो, समझो और आगे बढ़ो

श्रुत पंचमी जैन धर्म का एक पवित्र पर्व है, जिसे ज्ञान की आराधना का दिन माना जाता है। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाता है और मुख्य रूप से जैन आगम...

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