Tag - Jain_Pravachan

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भक्ति से उपसर्ग दूर होते हैं, भक्तामर और शांति भक्ति से अनेक उदाहरण : गुणों का अनुराग ही भक्ति है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में कहा कि भक्ति का अर्थ गुणों का अनुराग है और भक्ति से जीवन के उपसर्ग दूर हो जाते हैं। उन्होंने शास्त्रों और उदाहरणों...

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भावनाओं का अनुशासन ही उन्नति का पथ प्रशस्त करता है : दुर्वलताओं पर अंकुश से जीवन का उद्धार संभव – मुनि श्री प्रमाण सागर”

भोपाल (अवधपुरी) में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने “भावनाओं का अनुशासन” विषय पर प्रवचन देते हुए कहा कि अनुशासित जीवन ही व्यक्ति को क्रोध, लोभ, मोह और भय से...

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