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आदर्श भगवान वह जो निंदकों से द्वेष और प्रशंसकों से राग नहीं करता; भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज

धर्मनगरी सहारनपुर के बीर नगर जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने अपने उपदेशों में कहा कि आदर्श भगवान वही हैं जो प्रशंसा से...

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भक्ति से उपसर्ग दूर होते हैं, भक्तामर और शांति भक्ति से अनेक उदाहरण : गुणों का अनुराग ही भक्ति है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में कहा कि भक्ति का अर्थ गुणों का अनुराग है और भक्ति से जीवन के उपसर्ग दूर हो जाते हैं। उन्होंने शास्त्रों और उदाहरणों...

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